अगले पांच-छह महीने में अपराध अनुसंधान पूरी तरह डिजिटल होगा : एडीजी

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अगले पांच-छह महीने में अपराध अनुसंधान पूरी तरह डिजिटल होगा : एडीजी

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  • Publish Date - May 18, 2026 / 07:37 PM IST,
    Updated On - May 18, 2026 / 07:37 PM IST

पटना, 18 मई (भाषा) बिहार पुलिस अगले पांच से छह महीनों में अपराध अनुसंधान की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है और इसके तहत अपराध अनुसंधान में विभिन्न डिजिटल एप और पोर्टल के उपयोग को बढ़ाने के साथ-साथ डाटा अपडेट और ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पारसनाथ ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि अपराध नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक तरीके से त्वरित और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से पुलिस पदाधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और पिछले वर्ष से अब तक छह बैचों में 2,018 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि राज्य के 968 थानों को ‘क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम’ (सीसीटीएनएस) से जोड़ा जा चुका है, जबकि शेष थानों को भी जल्द जोड़ा जाएगा।

एडीजी ने बताया कि ‘ई-साक्ष्य’ पोर्टल पर जनवरी से अप्रैल के बीच 68,844 मामलों से जुड़े दस्तावेज अपलोड किए गए हैं। वहीं ‘मिशन वात्सल्य’ पोर्टल पर गुमशुदा और पीड़ित नाबालिग बच्चों का विवरण दर्ज किया जाता है।

अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा ‘ई-प्रिजन’, ‘इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम’ (आईसीजेएस) और ‘नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (एनएएफआईएस) जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग जेल प्रबंधन, संस्थानों के बीच समन्वय और फिंगरप्रिंट पहचान के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इन तकनीकी प्रयासों के जरिए बिहार पुलिस अपराध अनुसंधान को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

भाषा कैलाश रंजन

रंजन