Who is Kalita Majhi: कभी लोगों के घरों में करती थीं झाड़ू-पोछा, अब बनी भाजपा सरकार में मंत्री.. जानिए कौन है कलिता माझी?
कभी लोगों के घरों में करती थीं झाड़ू-पोछा, अब बनी भाजपा सरकार में मंत्री.. Who is Kalita Majhi, Minister in Bengal government
कोलकाता। Who is Kalita Majhi? लोकतंत्र में जनता का भरोसा और संघर्ष की ताकत किसी भी व्यक्ति की तकदीर बदल सकती है। पश्चिम बंगाल में इसकी ताजा मिसाल बनी हैं कलिता माझी, जो कुछ वर्ष पहले तक दूसरों के घरों में घरेलू कामकाज कर अपने परिवार का गुजारा करती थीं। आज वही कलिता विधानसभा चुनाव जीतकर मंत्री पद तक पहुंच गई हैं।
Who is Kalita Majhi? पूर्वी बर्दवान जिले के आउसग्राम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं कलिता माझी ने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे। आर्थिक तंगी में बीता जीवन, मजदूरी करने वाला पति और सीमित संसाधनों के बीच परिवार की जिम्मेदारियां संभालने वाली कलिता ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन राज्य सरकार में मंत्री के रूप में शपथ लेंगी। राजनीति में उनका सफर वर्ष 2021 में शुरू हुआ, जब भाजपा ने पहली बार उन्हें आउसग्राम सीट से उम्मीदवार बनाया। उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने क्षेत्र में अपनी सक्रियता और जनसंपर्क नहीं छोड़ा। गांव-गांव और मोहल्लों में लोगों के बीच रहकर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। पांच साल बाद जब पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया तो उन्होंने इस अवसर को ऐतिहासिक जीत में बदल दिया। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता और जिला परिषद अध्यक्ष श्यामाप्रसाद लोहार को 12 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित कर सभी राजनीतिक समीकरणों को उलट दिया। मंत्री पद की शपथ लेने के बाद भावुक नजर आईं कलिता ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जीवन में इतना बड़ा सम्मान मिलेगा। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पार्टी नेतृत्व और क्षेत्र की जनता को दिया।
कलिता की जीत की खबर जैसे ही उनके इलाके में पहुंची, समर्थकों ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया। सबसे भावुक वे परिवार दिखाई दिए, जिनके घरों में कभी कलिता घरेलू कामगार के रूप में काम करती थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कलिता की सफलता मेहनत, ईमानदारी और जनसेवा की जीत है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कलिता माझी की कहानी केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के लिए उम्मीद का संदेश है। यह बताती है कि लोकतंत्र में आम नागरिक भी अपनी मेहनत और जनसमर्थन के बल पर सत्ता के सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकता है।
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