मुंबई, 30 मार्च (भाषा) उद्योग जगत को दिया बैंक ऋण 28 फरवरी को समाप्त पखवाड़े में 13.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह वृद्धि 7.5 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सोमवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
आरबीआई के अनुसार कर्ज में वृद्धि का कारण अवसंरचना, ‘ऑल इंजीनियरिंग’, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद, पेट्रोलियम, कोयला उत्पाद और परमाणु ईंधन तथा वस्त्र क्षेत्रों को दिए ऋण में बढ़ोतरी है।
केंद्रीय बैंक ने फरवरी 2026 के लिए क्षेत्रवार बैंक ऋण वितरण से संबंधित आंकड़े जारी किए है। आंकड़े 41 चयनित अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) से एकत्र किए गए। ये बैंक सभी वाणिज्यिक बैंकों के कुल गैर-खाद्य ऋण का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
आरबीआई ने कहा, ‘‘ 28 फरवरी 2026 को समाप्त पखवाड़े में गैर-खाद्य बैंक ऋण सालाना आधार पर 14.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि (सात मार्च 2025) में यह वृद्धि 11.1 प्रतिशत थी।’’
उद्योग क्षेत्र को ऋण में सालाना आधार पर 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 7.5 प्रतिशत से अधिक है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों को दिए गए ऋण में दहाई अंकों की वृद्धि जारी रही, जबकि बड़े उद्योगों को दिए गए ऋण में भी उच्च वृद्धि दर्ज की गई।
आंकड़ों के अनुसार, सेवा क्षेत्र को दिए गए ऋण में सालाना आधार पर 16.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 11.7 प्रतिशत थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और वाणिज्यिक रियल एस्टेट को दिए गए ऋण में बढ़ोतरी के कारण हुई।
आरबीआई ने कहा कि व्यक्तिगत ऋण खंड में सालाना आधार पर 15.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो एक वर्ष पहले 11.7 प्रतिशत थी। इसमें आवास ऋण में स्थिर वृद्धि जारी रही जबकि वाहन ऋण और सोने के आभूषण के बदले ऋण जैसे खंडों में तेज विस्तार बना रहा।
आरबीआई के अनुसार कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को दिए गए ऋण में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह वृद्धि 11.4 प्रतिशत थी।
भाषा निहारिका रमण
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