बजट में रोजगार-सृजन, निर्यात समर्थन को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरतः फिक्की सर्वे

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बजट में रोजगार-सृजन, निर्यात समर्थन को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरतः फिक्की सर्वे

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  • Publish Date - January 22, 2026 / 05:32 PM IST,
    Updated On - January 22, 2026 / 05:32 PM IST

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) वैश्विक व्यापार तनावों में बढ़ोतरी के बीच आगामी बजट में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और निर्यात को मजबूत समर्थन दिए जाने की जरूरत है। फिक्की के एक सर्वेक्षण में यह बात कही गई है।

उद्योग मंडल फिक्की की तरफ से बृहस्पतिवार को जारी सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश उद्योग प्रतिनिधियों ने भारत की आर्थिक वृद्धि संभावनाओं को लेकर भरोसा जताया है।

सर्वे में शामिल आधे उद्योग प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई है कि वित्त वर्ष 2026-27 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर सात से आठ प्रतिशत के दायरे में बनी रहेगी। वहीं 80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मध्यम अवधि के आर्थिक बुनियादी पहलुओं पर विश्वास जताया है।

यह सर्वे दिसंबर 2025 के अंत से जनवरी 2026 के मध्य के दौरान किया गया था, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की लगभग 100 कंपनियों ने भाग लिया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी।

फिक्की ने कहा, ‘बढ़ते वैश्विक व्यापार तनाव, शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं के कारण उद्योग जगत को बजट से निर्यात समर्थन की स्पष्ट अपेक्षा है। निर्यात प्रदर्शन को मजबूत करने और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में बेहतर एकीकरण के लिए प्रतिभागियों ने व्यापार सुविधा और सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने, लॉजिस्टिक एवं बंदरगाह संबंधी अड़चनों को कम करने और निर्यात प्रोत्साहन एवं रिफंड व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।’

गैर-शुल्क बाधाओं के तौर पर यूरोपीय संघ के सीबीएएम और वन-कटौती नियमों का उल्लेख किया गया है। सीबीएएम व्यवस्था के तहत इस्पात, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसे उत्पादों के उत्पादन में होने वाले कार्बन उत्सर्जन पर शुल्क लगाया जाता है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए आरओडीटीईपी योजना (निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की वापसी) के तहत आवंटन बढ़ाने, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) नीति में सुधार और सीमा-शुल्क करों को युक्तिसंगत बनाए जाने की भी मांग की।

सर्वे के आधार पर केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं उभरकर सामने आई हैं। इनमें रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे पर लगातार जोर और निर्यात को मजबूत समर्थन शामिल हैं। बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, रक्षा और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की भी उम्मीद है।

उद्योग जगत ने राजकोषीय सूझबूझ के महत्व को भी रेखांकित किया। करीब 42 प्रतिशत उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य पर रहेगा, जिससे सरकार के राजकोषीय सशक्तीकरण खाके पर भरोसा मजबूत होता है।

सर्वे में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा बजट में पूंजीगत व्यय का हिस्सा बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने, ड्रोन पीएलआई योजना का आवंटन 1,000 करोड़ रुपये करने और 1,000 करोड़ रुपये का ड्रोन अनुसंधान एवं विकास कोष स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण