सीआईसी ने ईंधन गुणवत्ता जांच, धोखाधड़ी के रिकॉर्ड साझा करने से इंडियन ऑयल के इनकार को सही ठहराया

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सीआईसी ने ईंधन गुणवत्ता जांच, धोखाधड़ी के रिकॉर्ड साझा करने से इंडियन ऑयल के इनकार को सही ठहराया

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 08:29 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 08:29 PM IST

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत पिछले 10 वर्षों में देशभर में ईंधन गुणवत्ता जांच और धोखाधड़ी से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के इनकार के फैसले को उचित ठहराया है।

आयोग ने यह फैसला तब दिया, जब आवेदक ने दलील दी कि यह जानकारी जनहित से जुड़ी है।

आवेदक रॉबिन जाकियस ने कहा कि उपभोक्ता पहले ही ईंधन की ऊंची कीमतों का बोझ उठा रहे हैं और डिजिटल युग में इस तरह की जानकारी कंपनी के मुख्यालय में केंद्रीकृत रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।

केंद्रीय सूचना आयोग ने आईओसीएल की इस दलील को स्वीकार किया कि मांगी गई जानकारी उसकी 16 राज्य इकाइयों और 73 मंडलीय कार्यालयों में अलग-अलग उपलब्ध है। इसे एकत्र करने में विभाग के संसाधनों पर अत्यधिक बोझ पड़ेगा। इसलिए सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 7(9) के तहत यह सूचना देने से इनकार किया गया।

यह आदेश रॉबिन जाकियस द्वारा दायर उस अपील पर आया, जिसमें उन्होंने 2014 से 2023 तक वर्षवार आंकड़े मांगे थे। इनमें पेट्रोल पंप पर ईंधन की गुणवत्ता और मात्रा की जांच, ईंधन वितरण मशीनों में चिप के जरिये कथित हेराफेरी का पता लगाने के लिए किए गए निरीक्षण, नियमों का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंप के खिलाफ कार्रवाई, उपभोक्ता शिकायतें और सतर्कता रिपोर्ट का ब्योरा शामिल था।

सुनवाई के दौरान जाकियस ने कहा कि डिजिटल युग में इस तरह का डेटा कंपनी के मुख्यालय में एक स्थान पर उपलब्ध होना चाहिए।

आईओसीएल ने आयोग को बताया कि मांगी गई जानकारी वांछित प्रारूप में तत्काल उपलब्ध नहीं है।

कंपनी ने कहा कि देशभर में उसके लगभग 42,000 पेट्रोल पंप हैं और मानक परिचालन प्रक्रिया के तहत प्रत्येक पेट्रोल पंप का वर्ष में कम से कम दो बार निरीक्षण किया जाता है। इस तरह हर साल लगभग आठ लाख निरीक्षण होते हैं। ऐसे में 10 वर्षों की जानकारी एकत्र करना संभव नहीं है।

महारत्न कंपनी ने कहा कि एक जनवरी, 2014 से 31 दिसंबर, 2023 तक की जानकारी संकलित करने में उसके संसाधनों का अत्यधिक उपयोग होगा। इसलिए आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 7(9) के तहत यह सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।

आईओसीएल ने यह भी बताया कि सभी सक्रिय पेट्रोल पंप को चरणबद्ध तरीके से स्वचालित बनाया जा रहा है ताकि उनके परिचालन की बेहतर निगरानी की जा सके। साथ ही, ईंधन वितरण इकाइयों के लिए उन्नत उपकरण खरीदे जा रहे हैं, जिनका प्रमाणीकरण सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने किया है।

भाषा योगेश अजय

अजय