विजय माल्या को सोशल मीडिया पर अदालत के दस्तावेज साझा करने के खिलाफ चेतावनी

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विजय माल्या को सोशल मीडिया पर अदालत के दस्तावेज साझा करने के खिलाफ चेतावनी

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 08:29 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 08:29 PM IST

मुंबई, 22 सितंबर (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने धन शोधन के आरोपी कारोबारी विजय माल्या को मंगलवार को चेतावनी दी कि वह उनका मामला लंबित रहने के दौरान अदालत के दस्तावेज सोशल मीडिया पर साझा न करें।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील आशीष मेहता ने न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव को बताया कि माल्या ने उच्च न्यायालय में उनकी याचिका के जवाब में जांच एजेंसी की ओर से दाखिल हलफनामे को अदालत में जमा किए जाने से पहले ही अपने सोशल मीडिया खातों पर साझा कर दिया था।

मेहता ने बताया कि ईडी ने आठ सितंबर को हलफनामा दायर किया था और उसी दिन माल्या की कानूनी टीम को इसकी एक प्रति सौंपी थी। उन्होंने बताया कि मामले की सुनवाई नौ सितंबर को होनी थी।

हालांकि, मेहता ने कहा कि शराब कारोबार से जुड़े रहे माल्या ने आठ सितंबर की शाम को ही अपने सोशल मीडिया खातों पर हलफनामे की प्रति अपलोड कर दी।

न्यायमूर्ति जाधव ने माल्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई से कहा कि वह अपने मुवक्किल को भविष्य में ऐसा नहीं करने की चेतावनी दें।

उन्होंने कहा, “यह अच्छा आचरण नहीं है। यह गंभीर मामला है। कृपया उन्हें (माल्या को) भविष्य में ऐसा नहीं करने की चेतावनी दें। वह जो कुछ भी कहना चाहते हैं, अदालत में कह सकते हैं।”

न्यायमूर्ति जाधव ने कहा, “कृपया अपने मुवक्किल को समझाएं कि यह तरीका सही नहीं है… इससे अदालत का प्रभाव कम होता है।”

माल्या ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को बंद करने के आग्रह को लेकर 2020 में याचिका दायर की थी। उन्होंने दावा किया था कि बैंकों के अपनी बकाया राशि वसूल लेने के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझ गया है।

ईडी ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा था कि माल्या भारत में कानूनी प्रक्रिया का सामना करने से बचते रहे हैं और केवल संपत्तियों की वसूली से उन्हें धनशोधन के आरोपों से मुक्ति नहीं मिल जाती।

उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर तक के लिए टाल दी। उसने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को अपना जवाब हलफनामे के रूप में दाखिल करने का निर्देश दिया।

माल्या पर अपनी बंद हो चुकी विमानन कंपनी ‘किंगफिशर एयरलाइंस’ को दिए गए कुल 9,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण में से कम से कम 3,500 करोड़ रुपये की हेराफेरी और धन शोधन का आरोप है।

ईडी ने 2016 में माल्या की संपत्तियां कुर्क कर दी थीं। 2019 में एक विशेष अदालत ने एसबीआई और दूसरे ऋण दाताओं को कर्ज की वसूली के लिए इन चल संपत्तियों का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी थी। इन संपत्तियों में यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (यूबीएचएल) के शेयर भी शामिल थे।

माल्या ने 2020 में इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

भाषा पारुल नरेश

नरेश