नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हुए व्यापार समझौते में व्यापक बाजार में बिकने वाली कारों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है और सिर्फ 25 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली यात्री कारों पर ही आयात शुल्क में क्रमिक छूट दी जाएगी। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि 25 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारों पर दी जाने वाली छूट सालाना 2.5 लाख कारों तक ही दी जाएगी।
इसके अलावा, यह कोटा मुख्य रूप से यूरोपीय संघ की पुरानी और मशहूर कार विनिर्माता कंपनियों को दिया जाएगा।
भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को इस समझौते पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की। इस समझौते को इसी साल हस्ताक्षरित और लागू किया जाएगा।
इस समझौते के तहत, भारत ने डीजल और पेट्रोल कारों के लिए सालाना 1.6 लाख कारों और इलेक्ट्रिक कारों के लिए 90,000 कारों का कोटा दिया है।
भारत ने 15,000 यूरो (लागत, बीमा, माल ढुलाई) से कम कीमत वाली कारों पर कोई आयात शुल्क छूट नहीं दी है। इसमें सीमा शुल्क, जीएसटी और सड़क कर जोड़ने के बाद कार की खुदरा कीमत लगभग 25-27 लाख रुपये होती है।
भारत की घरेलू कार बाजार में लगभग 90 प्रतिशत कारें 25 लाख रुपये से कम कीमत वाली हैं। भारत का यात्री वाहन बाजार अब दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है और सालाना 43 लाख से अधिक कारों की बिक्री होती है।
अधिकारी ने बताया कि भारत मुख्य रूप से बड़ी इंजन क्षमता वाली कारों और महंगी इलेक्ट्रिक कारों पर कोटा दे रहा है, जबकि छोटी इंजन क्षमता वाली और मध्यम से कम कीमत वाली कारों को सुरक्षित रखा जा रहा है।
समझौते के तहत, डीजल और पेट्रोल कारों के लिए कोटा तीन मूल्य श्रेणियों में बांटा गया है।
समझौते के मुताबिक, 15,000 यूरो से कम कीमत वाली कारों पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। वहीं 15,000 से 35,000 यूरो कीमत वाली कारों पर पहले वर्ष में आयात शुल्क 35 प्रतिशत होगा और इन पर सालाना 34,000 कारों का कोटा रहेगा।
इसके अलावा 35,000 से 50,000 यूरो और 50,000 यूरो से अधिक कीमत वाली कारों पर पहले वर्ष में आयात शुल्क 30 प्रतिशत होगा और हर श्रेणी में 33,000 कारों का कोटा होगा।
पहले वर्ष में कुल रियायती कोटा 100,000 वाहनों का होगा।
अधिकारी ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि इसका हिस्सा हमारे बाजार का केवल 2.5 प्रतिशत से कम रहेगा। यूरोपीय संघ भारतीय कार विनिर्माता कंपनियों को भारत को दिए गए कोटा से 2.5 गुना अधिक कोटा देगा।’
भाषा प्रेम योगेश
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