तोक्यो, 25 अगस्त (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को जापान के प्रमुख वित्तीय एवं निवेश संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह एवं निवेश साझेदारी को मजबूत करने और भारत की विकास यात्रा में जापानी भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक में मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (एमयूएफजी), डेवलपमेंट बैंक ऑफ जापान (डीबीजे), मिजुहो, मॉर्गन स्टेनली, नोमुरा और निप्पॉन लाइफ के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान भारत की आर्थिक संभावनाओं, उभरते निवेश अवसरों और जापानी संस्थागत निवेश को और सुगम बनाने के उपायों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
गोयल ने बैठकों में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पिछले साल 7.7 प्रतिशत बढ़ी और देश 2047 तक 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने भारत के मजबूत बैंकिंग क्षेत्र, पर्याप्त पूंजी और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के कम स्तर के साथ-साथ देश में बढ़ते मध्यम वर्ग और बढ़ती खर्च योग्य आय का उल्लेख किया।
मंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर, कृत्रिम मेधा (एआई), डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं।
वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘जापानी वित्तीय संस्थानों ने भारत के साथ बढ़ती भागीदारी साझा की और देश की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं पर मजबूत भरोसा जताया।’’
मंत्रालय ने कहा कि एमयूएफजी ने श्रीराम फाइनेंस में करीब चार अरब डॉलर के निवेश एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा हाइड्रोजन समेत विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती रुचि का उल्लेख किया। वहीं, डीबीजे ने भारत के लिए अपनी समर्पित रणनीति और रियल एस्टेट विकास, उद्यम पूंजी तथा अन्य दीर्घकालिक निवेशों में बढ़ती रुचि के बारे में बताया।
इसी तरह, मिजुहो ने भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों की बेहतर होती लाभप्रदता और पुणे में अपने वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) समेत भारत में बढ़ते परिचालन का उल्लेख किया।
मंत्रालय के अनुसार, ‘‘मॉर्गन स्टेनली ने भारत को अपने सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्रों में से एक बताया। यहां उसके 19,000 से अधिक कर्मचारी हैं। उसने भारत में अपने परिचालन के उच्च मूल्य वाले पूंजी बाजार और वित्तीय सेवा गतिविधियों की ओर बढ़ने का भी उल्लेख किया।’’
इसमें कहा गया कि नोमुरा ने भारत में अपनी लंबे समय से मौजूदगी और जापानी कंपनियों तथा वैश्विक उद्योगों को भारतीय अवसरों से जोड़ने में अपनी भूमिका को रेखांकित किया। इसमें कृत्रिम मेधा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उसकी प्रौद्योगिकी क्षमताएं भी शामिल हैं।
निप्पॉन लाइफ ने दीर्घकालिक पूंजी निवेश के महत्व पर जोर दिया और कहा कि उसके भारतीय परिचालन से मजबूत ‘रिटर्न’ मिला है।
चर्चा में जापानी संस्थागत पूंजी के भारत में प्रवाह को और सुगम बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रतिभागियों ने मुनाफे को वापस भेजने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, भारतीय पूंजी बाजारों तक पहुंच बेहतर करने और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अधिक नियामकीय स्थिरता सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।’’
इसमें कहा गया कि जापानी संस्थानों ने भारत को लेकर अपने दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण को सकारात्मक बताया, लेकिन यह भी कहा कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कुछ नियामकीय तथा नीतिगत पहलू अल्पावधि में निवेश संबंधी फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
बैठक में भारत में अंतरराष्ट्रीय पूंजी के प्रवेश द्वार के रूप में ‘गिफ्ट सिटी’ की संभावनाओं और जापान तथा भारत के बीच सीमा-पार निवेश प्रवाह को बढ़ाने के लिए इसे एक मंच के रूप में इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई।
गोयल ने कहा कि भारत केवल पूंजी नहीं, बल्कि ऐसी दीर्घकालिक साझेदारियां चाहता है जो प्रौद्योगिकी, नवाचार, विनिर्माण क्षमताएं, रोजगार एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण लेकर आएं।
यह चर्चा अगले दशक में भारत में 10 लाख करोड़ येन का जापानी निजी निवेश जुटाने के भारत-जापान लक्ष्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस बातचीत से प्रमुख जापानी वित्तीय संस्थानों का भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं पर मजबूत भरोसा और द्विपक्षीय निवेश, प्रौद्योगिकी तथा कारोबारी संबंधों के विस्तार की व्यापक संभावनाएं फिर स्पष्ट हुईं।’’
भाषा निहारिका वैभव
वैभव