नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र में सोयाबीन तथा गुजरात में मूंगफली की सरकारी बिकवाली से देश के तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को मूंगफली तेल तिलहन तथा सोयाबीन तिलहन के दाम में गिरावट देखी गई। इसके अलावा मलेशिया एक्सचेंज में 3.30 बजे गिरावट रहने के कारण कच्चे पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के दाम में भी गिरावट रही। सामान्य कामकाज के बीच सरसों तेल-तिलहन और सोयाबीन तेल के दाम स्थिर बने रहे।
शिकॉगो एक्सचेंज कल रात भी सुधार के साथ बंद हुआ था और फिलहाल भी यहां सुधार जारी है। मलेशिया एक्सचेंज में दोपहर साढ़े तीन बजे पौने दो पतिशत की गिरावट थी।
बाजार सूत्रों ने कहा कि मार्च में सोयाबीन डीगम तेल का आयात कम रहा है और अगले महीने भी आयात काफी कम रहने की संभावना है। जबकि शादी विवाह की मांग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। हालत यह है कि सोयाबीन डीगम तेल 5-6 रुपये किलो के प्रीमियम पर बिक रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को सोयाबीन के साथ-साथ मूंगफली की बिकवाली अभी नहीं करनी चाहिये। आगे दो-तीन महीने के बाद खाद्य तेलों की जरूरत बढ़ेगी तो उस वक्त बेचना लाभकारी हो सकता है। इससे तिलहनों की बुवाई पर भी कोई प्रतिकूल असर नहीं होगा। इसके अलावा सरकार को सरसों का भी स्टॉक बनाने की ओर ध्यान देना चाहिये ताकि स्टॉकिस्टों के पास ज्यादा माल न जाने पाये। एक बार बाजार में खरीद खत्म होने के बाद संकट की स्थिति में स्टॉकिस्ट द्वारा मनमाने दाम वसूलने का खतरा हो सकता है।
सूत्रों ने कहा कि आमतौर पर इन दिनों सरसों की आवक जिस तरह बढ़ती थी, उसकी इस बार कमी है। केवल एक बार मंडियों में 14 लाख बोरी की आवक हुई और अब वह आवक घटकर औसतन लगभग 10 लाख बोरी की रह गई है। आमतौर इन दिनों 16-17 लाख बोरी सरसों की आवक हुआ करती थी।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन के तेल रहित खल या डी-आयल्ड केक (डीओसी) की भी मांग कमजोर रहने से सोयाबीन तिलहन में गिरावट आई।
सूत्रों ने कहा कि पश्चिम एशिया के युद्ध बढ़ने की स्थिति में बाजार की क्या हालत होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। इस परिस्थिति से निपटने का रास्ता देश में तेल-तिलहन का उत्पादन बढ़ाना ही एक बेहतर रास्ता हो सकता है। इसके लिए देशी तेल-तिलहनों का बाजार बनाने की जरूरत सबसे पहले है। अगर युद्ध के जारी रहने की परिस्थिति में खाद्य तेलों के दाम बढ़े तो देशी तेल-तिलहन ही हमें राहत दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि खाद्य तेलों की प्रति व्यक्ति खपत बहुत कम है, इससे महंगाई पर कोई विशेष फर्क नहीं होगा बल्कि अच्छे दाम मिलने से किसानों में उत्पादन बढ़ाने का उत्साह बढ़ेगा। इस बार सरसों का उत्पादन बढ़ा और किसानों को अच्छे दाम भी मिले। किसानों के हाथ धन आयेगा तो वह यहां की अर्थव्यवस्था में ही परिचालित होगा जो सबके लिए लाभ की स्थिति होगी।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 6,975-7,000 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 7,175-7,650 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 17,350 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,735-3,035 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 14,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,435-2,535 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,435-2,580 रुपये प्रति टिन।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 16,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,700 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 13,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 13,400 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 14,400 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,200 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 14,100 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,625-5,675 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,225-5,375 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय