नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) दुनियाभर में जारी तनाव और कमजोर मांग के बावजूद, सरकार की ‘निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट’ (आरओडीटीईपी) के सहारे देश का निर्यात वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच 20 प्रतिशत की औसत सालाना दर से बढ़ने का अनुमान है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
‘निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट’
अधिकारी ने बताया कि इस योजना ने निर्यात के दायरे को बड़ा काम किया है। इसके तहत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) की भागीदारी वित्त वर्ष 2021-22 के 68 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में लगभग 75 प्रतिशत होने का अनुमान है। इससे छोटी कंपनियों को लागत के बढ़ते बोझ और घटते मुनाफे के बीच जरूरी राहत मिली है।
यह योजना एक जनवरी, 2021 को शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य निर्यात होने वाले सामान पर लगने वाले उन केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों को वापस करना है, जो किसी दूसरी योजना के तहत वापस नहीं मिलते। इससे विदेशी बाजारों में भारतीय निर्यातकों को दूसरे देशों के मुकाबले बराबरी का मौका मिलता है।
भाषा सुमित अजय
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