एचडीएफसी बैंक ने सीएसआर गतिविधियों पर बीते वित्त वर्ष में 1,316 करोड़ रुपये खर्च किए

एचडीएफसी बैंक ने सीएसआर गतिविधियों पर बीते वित्त वर्ष में 1,316 करोड़ रुपये खर्च किए

एचडीएफसी बैंक ने सीएसआर गतिविधियों पर बीते वित्त वर्ष में 1,316 करोड़ रुपये खर्च किए
Modified Date: July 30, 2026 / 02:51 pm IST
Published Date: July 30, 2026 2:51 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) एचडीएफसी बैंक ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने वित्त वर्ष 2025-26 में अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) पहल पर 1,316.18 करोड़ रुपये खर्च किए। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है।

बैंक ने बयान में कहा कि उसकी सीएसआर पहल ‘परिवर्तन’ के माध्यम से अब तक 10.77 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

बयान के अनुसार, एचडीएफसी बैंक ने अपने इस कार्यक्रम के तहत अब तक लगभग 7,492 करोड़ रुपये का संचयी निवेश किया है। इसके तहत सीएसआर पहल अब देश के सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी हैं।

बैंक के प्रमुख ‘समग्र ग्रामीण विकास कार्यक्रम’ (एचआरडीपी) का दायरा बढ़कर देश के 11,000 से अधिक गांवों तक पहुंच गया है, जबकि एक वर्ष पहले यह 10,430 से अधिक गांवों में संचालित था।

जल संरक्षण, कृषि, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामुदायिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए यह कार्यक्रम ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ ग्रामीण परिवेश को भी मजबूत कर रहा है।

बयान में कहा गया है कि वर्ष के दौरान उसने दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार किया और सीमा क्षेत्र के 498 गांवों तक अपनी पहुंच बढ़ाई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 298 थी। यह पहल केंद्र सरकार के ‘बॉर्डर क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ और ‘वाइब्रेंट ग्रामीण कार्यक्रम’ के तहत राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

इन क्षेत्रों में ग्रामीण विद्युतीकरण, आजीविका संवर्धन तथा कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी अवसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।

एचडीएफसी बैंक के उप प्रबंध निदेशक कैजाद भड़ूचा ने कहा, ‘‘इस वर्ष एचआरडीपी को और मजबूत बनाने तथा सीमा क्षेत्र के गांवों तक पहुंच बढ़ाने के हमारे प्रयास इस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं कि विकास की प्रक्रिया से कोई भी समुदाय वंचित न रहे। आगे भी हम इसी सोच के साथ काम करते रहेंगे कि विकास समावेशी, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर हो।”

भाषा रमण अजय

अजय


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