उच्च न्यायालय: नए मंत्री हवाई अड्डों के नामकरण के लिए नीति तैयार करने को प्राथमिकता दें

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उच्च न्यायालय: नए मंत्री हवाई अड्डों के नामकरण के लिए नीति तैयार करने को प्राथमिकता दें

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  • Publish Date - July 9, 2021 / 12:46 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:37 PM IST

मुंबई, नौ जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार को देश भर में हवाई अड्डों के नामकरण के लिए एक समान नीति तैयार करनी चाहिए और और नए नागरिक उड्डयन मंत्री को इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि नए नागरिक उड्डयन मंत्री (ज्योतिरादित्य सिंधिया) को इस संबंध में नीति तैयार करने को अपना ‘‘पहला काम’’ मानना ​​​​चाहिए।

पीठ ने कहा कि वह नवी मुंबई में पिछले महीने हुए घटना की अनुमति नहीं दे सकती है, जब लगभग 25,000 लोगों ने कोविड-19 प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए एक रैली का आयोजन कर आगामी हवाई अड्डे का नाम एक स्थानीय नेता के नाम पर रखने की मांग की।

नवी मुंबई में 24 जून को स्थानीय कृषि और मछली पकड़ने वाले समुदायों के हजारों लोगों ने कुछ राजनेताओं के साथ दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता और सांसद डी बी पाटिल के नाम पर नवी मुंबई में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम रखने की मांग के लिए प्रदर्शन किया।

पिछले महीने की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार और राज्य द्वारा संचालित नगर नियोजन एजेंसी सिडको ने शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे के नाम पर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का नाम रखने की घोषणा की थी।

अदालत ने कहा कि 2016 में एक मसौदा नीति तैयार की गई थी, जिसमें शहरों के नाम पर हवाई अड्डों का नाम रखने का प्रस्ताव था, न कि व्यक्तियों के नाम पर। हालांकि, ऐसी नीति की वर्तमान स्थिति ज्ञात नहीं है।

पीठ ने केंद्र सरकार के वकील अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह से कहा, ‘‘हम मसौदा नीति की वर्तमान स्थिति जानना चाहेंगे?’’

अदालत ने आगे कहा, ‘‘यदि कोई नई नीति अभी भी मसौदा स्तर पर है, तो इसे अभी पूरा करें। आपके पास अभी नए-नए बने मंत्री हैं। नए विमानन मंत्रालय को यह काम करने दीजिए। यह नए विमानन मंत्री का पहला कार्य होना चाहिए।’’

पीठ वरिष्ठ वकील फिल्जी फ्रेडरिक द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र को हवाई अड्डों के नामकरण और नाम बदलने के लिए एक समान नीति तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

भाषा पाण्डेय मनोहर

मनोहर