जेपी मॉर्गन सूचकांक में भारत की सरकारी प्रतिभूतियों के शामिल होने से बढ़ेगा पूंजी प्रवाह: विशेषज्ञ

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जेपी मॉर्गन सूचकांक में भारत की सरकारी प्रतिभूतियों के शामिल होने से बढ़ेगा पूंजी प्रवाह: विशेषज्ञ

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  • Publish Date - September 22, 2023 / 06:58 PM IST,
    Updated On - September 22, 2023 / 06:58 PM IST

मुंबई, 22 सितंबर (भाषा) वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी जे पी मॉर्गन के अगले साल जून से भारतीय सरकारी बॉन्ड को अपने वैश्विक सूचकांक में शामिल करने के फैसले से देश के प्रतिभूति बाजार में 18 से 21 माह में 20-25 अरब अमेरिकी डॉलर का सीधा प्रवाह होगा। विशेषज्ञों ने यह बात कही।

वैश्विक वित्तीय कंपनी जे पी मॉर्गन ने अगले साल से भारत की सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) को अपने उभरते बाजार सूचकांक में शामिल करने की शुक्रवार को घोषणा की। इससे जीबीआई-ईएम (वैश्विक बॉन्ड सूचकांक-उभरता बाजार) ‘ग्लोबल डायवर्सिफाइड’ में भारत का भारांश 10 प्रतिशत और जीबीआई-ईएम वैश्विक सूचकांक में करीब 8.7 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।

जे पी मॉर्गन ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि 73 प्रतिशत निवेशक इस फैसले के पक्ष में हैं। भारतीय सरकारी बॉन्ड को 28 जून 2024 से 31 मार्च 2025 तक 10 महीने की अवधि में क्रमबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा।

बार्कलेज में एशिया के उभरते बाजार के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख राहुल बजोरिया ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि इससे 18-21 महीने में 20-25 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष प्रवाह होगा…।’’

जापानी ब्रोकरेज नोमुरा ने 23.6 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश होने का अनुमान लगाया है। यह सूचकांक के तहत प्रबंधन अधीन 236 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति का 10 प्रतिशत है।

कम से कम 23 सरकारी प्रतिभूतियां वैश्विक सूचकांक में शामिल होने के लिए पात्र हैं। इसका कुल मूल्य 330 अरब अमेरिकी डॉलर है।

हालांकि बाजोरिया ने कहा कि ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स और एफटीएसई रसेल वर्ल्ड गवर्नमेंट बॉन्ड इंडेक्स जैसे अन्य प्रमुख बॉन्ड सूचकांकों में देश के शामिल होने की संभावनाएं कम हैं। इसका कारण उन्हें यूरो में निपटान की क्षमता और उच्च सरकारी साख की आवश्यकता है।

जे पी मॉर्गन के फैसले पर सरकार ने कहा कि इस कदम से सरकार के लिए उधार लेने की लागत कम हो जाएगी क्योंकि इससे उच्च विदेशी प्रवाह को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। इसका कारण कई विदेशी कोषों का वैश्विक सूचकांकों पर नजर रखना अनिवार्य किया गया है।

इससे विदेशों से सूचकांकों में निवेश वाले कोष (पैसिव फंड) लाने में भी मदद मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप उद्योग के लिए अधिक घरेलू पूंजी उपलब्ध होगी।

आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने इस बारे में एक बयान में कहा, ‘‘यह स्वागत योग्य कदम है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसे को बताता है।’’

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा, ‘‘ हम इस कदम का स्वागत करते हैं… यह वित्तीय बाजार सहभागियों तथा वित्तीय बाजारों की भारत की क्षमता व वृद्धि की संभावनाओं और उसकी व्यापक आर्थिक व राजकोषीय नीतियों पर भरोसे को दर्शाता है।’’

बाजोरिया ने कहा कि बॉन्ड को शामिल करने से तेल की ऊंची कीमतों के कारण भुगतान संतुलन की स्थिति कमजोर होने की आशंकाएं कम होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें हमारे 40 अरब अमेरिकी डॉलर के चालू खाते के घाटे के अनुमान में मामूली बढ़ोतरी का जोखिम दिख रहा है, लेकिन घाटे की भरपाई को लेकर चिंता वाली कोई बात नहीं दिखती…।’’

वहीं नोमुरा के विशेषज्ञों ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि बड़े निवेशक पहले से ही अपने कोष का दो-तीन प्रतिशत सरकारी प्रतिभूतियों में लगा चुके हैं। इस साल अभी तक विदेशी इकाइयों ने शुद्ध रूप से तीन-चार अरब अमेरिकी डॉलर के भारतीय बॉन्ड खरीदे हैं।’’

भाषा निहारिका रमण

रमण