ASI Bhojshala Order: हाई कोर्ट के फैसले के बाद ASI ने दिया ऐतिहासिक मोड़, भोजशाला अब पूरी तरह हिंदू पूजा स्थल, साल में इतने दिन कर सकेंगे पूजा

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ASI Bhojshala Order: हाई कोर्ट के फैसले के बाद ASI ने दिया ऐतिहासिक मोड़, भोजशाला अब पूरी तरह हिंदू पूजा स्थल, साल में इतने दिन कर सकेंगे पूजा

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  • Publish Date - May 16, 2026 / 09:11 PM IST,
    Updated On - May 16, 2026 / 09:15 PM IST

ASI Bhojshala OrderImage- AI Generated

HIGHLIGHTS
  • धार भोजशाला को High Court ने मंदिर मानते हुए पूजा की अनुमति दी
  • ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की मूर्ति
  • ASI ने आदेश में “कमाल मौला मस्जिद” का नाम हटाकर भोजशाला को वर्षभर खुला रखा

ASI Bhojshala Order: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया था। अदालत ने भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा करने की ​इजाजत भी दे दी है। साथ ही कोर्ट ने ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की मूर्ति को वापस भारत लाने के निर्देश दिए है।

इसी बीच अब धार भोजशाला पर ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है, हाईकोर्ट के फैसले के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने नया आदेश जारी किया है, अब साल के सभी दिन हिन्दुओं को बिना किसी रोक-टोक के पूजा करने की अनुमति मिल गई है।

ASI (ASI Bhojshala Order) ने नई विज्ञप्ति में “कमाल मौला मस्जिद” का उल्लेख हटाकर केवल “भोजशाला” नाम दर्ज किया है। आदेश में भोजशाला को “राजा भोज द्वारा स्थापित संस्कृत पाठशाला” के रूप में संबोधित किया गया है। वही हाईकोर्ट के फैसले और ASI के आदेश के बाद हिंदू संगठनों व श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।

विधायक आरिफ मसूद ने जाहिर की नाराजगी

कोर्ट के इस फैसले (ASI Bhojshala Order) पर विधायक आरिफ मसूद ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा एएसआई ने गलत तथ्य रखे उसी को मानकर कोर्ट ने फैसला दिया है। विधायक ने बताया कि वह फैसले से सहमत नहीं है। भोजशाला में नमाज नहीं पढ़ने के फैसले पर कहा कि फिलहाल एडमिनिस्ट्रेशन को ऐसा कोई फैसला नहीं लेना चाहिए, क्योंकि हम लोग सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने ये भी कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से फैसला नहीं होता तब तक मुसलमानों को नमाज पढ़ने से नहीं रोका जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून का मैं सम्मान करता हूं सभी लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने तक संयम बनाए रखें।

 

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धार भोजशाला किसे समर्पित है?

भोजशाला को राजा भोज द्वारा स्थापित संस्कृत पाठशाला माना जाता है और हिंदू पूजा स्थल के रूप में High Court ने मान्यता दी है।

हिंदू पक्ष को क्या अनुमति मिली है?

अब हिंदू श्रद्धालु साल के सभी दिनों में भोजशाला में पूजा कर सकते हैं।

ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूर्ति का क्या हाल होगा?

कोर्ट के आदेश के अनुसार मां वाग्देवी की मूर्ति भारत लौटाई जाएगी।

ASI ने भोजशाला का नाम कैसे बदल दिया?

ASI ने “कमाल मौला मस्जिद” का उल्लेख हटाकर सिर्फ “भोजशाला” नाम दर्ज किया है।

इस फैसले से श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया क्या रही?

हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं में High Court और ASI के फैसले के बाद उत्साह और खुशी का माहौल है।