नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) की मेजबानी में रणनीतिक नेतृत्वकर्ता बनने और दुनिया की ज्ञान अर्थव्यवस्था के लिए अपरिहार्य बनने की आकांक्षा रखता है।
‘सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट 2026’ को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2024 में जहां भारत में हर सप्ताह एक नया जीसीसी स्थापित हो रहा था, वहीं अब औसतन हर दिन एक नया केंद्र जुड़ रहा है। इसके साथ ही भारत दुनिया के आधे से अधिक जीसीसी का मेजबान बन चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत का जीसीसी परिवेश अब उस स्तर पर पहुंच गया है, जहां केवल संख्या और विस्तार सफलता का पैमाना नहीं रह गया है। अब ध्यान इस बात पर है कि देश से वैश्विक कंपनियां अगली पीढ़ी के उत्पाद, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां और कारोबारी रणनीतियां विकसित कर सकें।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य केवल दुनिया के क्षमता केंद्रों की मेजबानी करना नहीं है, बल्कि अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और भविष्य के उद्यमों को आकार देना है। यही वह बदलाव है, जिसके जरिये भारत क्षमता से नेतृत्व की ओर बढ़ेगा।’
उन्होंने कहा कि भारत की जीसीसी यात्रा केवल एक सफल क्षेत्र की कहानी नहीं है, बल्कि यह देश को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य बनाने और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती हासिल करने से जुड़ी है।
सीतारमण ने कहा कि भारत में वर्तमान में 2,100 से अधिक जीसीसी हैं, जिनमें 23 लाख पेशेवर सीधे तौर पर कार्यरत हैं और इनसे करीब 1,000 अरब डॉलर का वार्षिक राजस्व प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत के सामने अगले दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने का बड़ा अवसर है। ‘फॉर्च्यून ग्लोबल-2000’ की करीब दो-तिहाई कंपनियों ने अभी तक भारत में जीसीसी स्थापित नहीं किए हैं, जो निवेश का एक बड़ा अवसर है।
भाषा योगेश अजय
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