भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते में सीबीएएम मुद्दों के समाधान के लिए व्यापक प्रावधान: अधिकारी

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भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते में सीबीएएम मुद्दों के समाधान के लिए व्यापक प्रावधान: अधिकारी

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  • Publish Date - July 30, 2026 / 04:45 PM IST,
    Updated On - July 30, 2026 / 04:45 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में यूरोपीय संघ के कार्बन कर से जुड़ी चिंताओं के समाधान के लिए एक व्यापक कार्ययोजना शामिल है। वाणिज्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने उम्मीद जताई कि इस व्यवस्था से घरेलू लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) को कोई दिक्कत नहीं होगी।

वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने कहा कि अगर यूरोपीय संघ 27 देशों के समूह से बाहर अन्य देशों को कोई छूट देता है तो भारत को भी उसी तरह राहत दिए जाने का प्रावधान होगा।

कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) मामले में काफी काम किए गए हैं। समझौते के मसौदे में सीबीएएम से निपटने के लिए अलग परिशिष्ट शामिल किया गया है, जिसमें कुछ प्रमुख आधार तय किए गए हैं।

जैन ने कहा, ‘‘पहला आधार यह है कि भविष्य में अगर कोई रियायत दी जाती है तो वह भारत के लिए भी उपलब्ध होगी। इसके लिए एक दायित्व तय किया गया है।’’

उन्होंने कहा कि दूसरा मुद्दा एसएमई के बीच सीबीएएम अनुपालन को लेकर चिंता का है। इसमें सत्यापन, उत्पाद में निहित कार्बन की मात्रा का आकलन और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि सत्यापन करने वाली संस्थाओं को यूरोपीय संघ के अधिकारियों से मान्यता प्राप्त हो।

जैन ने कहा, ‘‘हमारे पास यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ यह चर्चा करने का प्रावधान भी है कि भारत में चुकाए गए कार्बन मूल्य को यूरोप में लगाए जाने वाले कार्बन मूल्य में किस तरह समायोजित किया जाए।’’

वह यहां इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईजीसीसी) के उद्योग संवाद-2026 में उस सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें यह पूछा गया था कि क्या सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) को इस व्यवस्था से यूरोपीय संघ के देशों को होने वाले निर्यात पर असर पड़ने की चिंता हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सीबीएएम को लेकर परिशिष्ट में एक व्यापक कार्ययोजना है और हम इस पर काम कर रहे हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि एसएमई को कोई समस्या नहीं होगी।’’

सीबीएएम या कार्बन कर एक जनवरी से लागू हुआ है।

इस कर के तहत यूरोपीय संघ इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक और सीमेंट जैसे उत्पादों पर कार्बन कर लगाएगा, क्योंकि इनके निर्माण के दौरान तय सीमा से अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है। फिलहाल यह कर इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों पर लागू है।

भाषा यासिर अजय रमण

रमण