चीन से सात उत्पादों की कथित डंपिंग की भारत ने शुरू की जांच

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चीन से सात उत्पादों की कथित डंपिंग की भारत ने शुरू की जांच

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 05:21 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 05:21 PM IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) भारत ने घरेलू विनिर्माताओं की शिकायतों के बाद चीन से इंजीनियरिंग और दवा क्षेत्र के सामान समेत सात उत्पादों की कथित डंपिंग की जांच शुरू की है।

वाणिज्य मंत्रालय की इकाई व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ये जांच कर रहा है।

महानिदेशालय की सात अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार, ये उत्पाद पैरा-टर्शियरी-ऑक्टाइल फिनोल फॉर्मेल्डिहाइड टैकिफायर रेजिन (टायर और रबड़ उद्योग में इस्तेमाल), पेनिसिलिन जी व इसके लवण (एक सक्रिय औषधीय सामग्री), 6-अमीनो पेनिसिलेनिक एसिड (एक महत्वपूर्ण दवा मध्यवर्ती), टी-आकार के एलिवेटर/लिफ्ट सॉलिड गाइड रेल, एमोक्सिसिलिन ट्राइहाइड्रेट (दवा उद्योग में इस्तेमाल), मोंटेलुकास्ट सोडियम (दवा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल) और कोपॉलिमर पॉलीऑल (गद्दे बनाने में इस्तेमाल) हैं।

घरेलू कंपनियों ने अपने आवेदनों में आरोप लगाया कि चीन से इन उत्पादों के डंप किए गए आयात से उनके कारोबार पर असर पड़ रहा है। उन्होंने इन आयात पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने का अनुरोध किया है।

डीजीटीआर यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया, ताइवान और अमेरिका से ‘एडी-आइसोप्रोपाइल अल्कोहल’ (हैंड सैनिटाइजर में इस्तेमाल) की डंपिंग की भी जांच कर रहा है।

एक अन्य जांच रूस से पेंट और वार्निश उद्योग में इस्तेमाल होने वाले रसायन पेंटाएरीथ्रिटोल की कथित डंपिंग को लेकर जारी है।

महानिदेशालय की एक अधिसूचना में कहा गया, ‘‘आवेदक द्वारा पेश किए गए उचित रूप से प्रमाणित लिखित आवेदन और डंपिंग के संबंध में उसके द्वारा पेश किए गए प्रथम दृष्टया साक्ष्य के आधार पर प्राधिकरण संतुष्ट होने के बाद डंपिंग रोधी जांच शुरू करता है।’’

यदि यह पाया जाता है कि डंपिंग से घरेलू कंपनियों को गंभीर नुकसान हुआ है, तो डीजीटीआर इस तरह के आयात पर शुल्क लगाने की सिफारिश करेगा।

इन शुल्क को लगाने का अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय करता है।

अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और चीन की बड़ी औद्योगिक अतिरिक्त क्षमता से सस्ते चीनी सामान की भारत में डंपिंग का बड़ा जोखिम पैदा होता है। हाल के समय में भारत ने चीन से कुछ वस्तुओं के डंप किए गए आयात के खिलाफ इस तरह की कई जांच शुरू की हैं।

डंपिंग-रोधी जांच यह पता लगाने के लिए की जाती है कि सस्ते आयात में बढ़ोतरी से घरेलू उद्योग को नुकसान हुआ है या नहीं।

देश इससे निपटने के लिए जिनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की बहुपक्षीय व्यवस्था के तहत ये शुल्क लगाते हैं। इस शुल्क का उद्देश्य उचित व्यापारिक गतिविधियों को सुनिश्चित करना और घरेलू उत्पादकों तथा विदेशी उत्पादकों एवं निर्यातकों के बीच समान अवसर उपलब्ध कराना है।

भारत और चीन विश्व व्यापार संगठन के सदस्य हैं। भारत ने चीन समेत विभिन्न देशों से सस्ते आयात से निपटने के लिए कई उत्पादों पर पहले ही डंपिंग रोधी शुल्क लगाया हुआ है।

डीजीटीआर ने एक अन्य अधिसूचना में कहा कि उसने इस आरोप की जांच शुरू की है कि चीन और दक्षिण कोरिया से आने वाले ‘अलॉय स्टील चिसेल/टूल और हाइड्रोलिक रॉक ब्रेकर पूर्ण रूप से असेंबल स्थिति में’ पर लगाए गए डंपिंग-रोधी शुल्क से बचने के लिए इन उत्पादों को मलेशिया के रास्ते भारत भेजा जा रहा है।

डीजीटीआर ने मलेशिया, थाइलैंड और वियतनाम से निर्यात किए जाने वाले तांबे की ट्यूब और पाइप के आयात पर सब्सिडी-रोधी जांच की समीक्षा भी शुरू की है।

राम रत्ना वायर्स लिमिटेड और मेटट्यूब कॉपर इंडिया ने उत्पाद के आयात पर लगाए गए मौजूदा प्रतिपूर्ति शुल्क को जारी रखने के अनुरोध के साथ आवेदन दायर किया है।

डीजीटीआर ने एक अलग अधिसूचना में कहा, ‘‘प्राधिकरण ने आयात पर मौजूदा प्रतिपूर्ति शुल्क को जारी रखने की जरूरत की समीक्षा के लिए जांच शुरू की है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि मौजूदा प्रतिपूर्ति शुल्क की अवधि समाप्त होने से सब्सिडी जारी रहने या फिर से मिलने और इसके परिणामस्वरूप घरेलू उद्योग को नुकसान होने की आशंका है या नहीं।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय