भारत, अमेरिका मार्च के मध्य तक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं: गोयल

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भारत, अमेरिका मार्च के मध्य तक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं: गोयल

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  • Publish Date - February 5, 2026 / 04:59 PM IST,
    Updated On - February 5, 2026 / 04:59 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और अमेरिका मार्च के मध्य तक बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसके बाद अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क कम कर देगा।

समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत भी अमेरिका से आयातित कुछ वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करना शुरू करेगा।

मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर एक संयुक्त बयान को चार से पांच दिन में अंतिम रूप देने और उस पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद अमेरिका द्वारा लगाया गया शुल्क घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा।

दोनों देशों ने इस सप्ताह की शुरुआत में समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके तहत अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामान पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण लगभग तैयार है और हमें उम्मीद है कि अगले चार से पांच दिन में हम अमेरिका तथा भारत के बीच एक संयुक्त बयान को अंतिम रूप देकर उस पर हस्ताक्षर कर देंगे। इसके आधार पर इस साझेदारी का पहला चरण शुरू होगा।’’

गोयल ने कहा कि औपचारिक समझौते का मसौदा तैयार किया जा रहा है जिसमें एक या डेढ़ महीने का समय लग सकता है। संभवत: औपचारिक समझौते पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर हो जाएंगे।

भारतीय वस्तुओं पर कम किए गए 18 प्रतिशत शुल्क अमेरिका के एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से लागू होंगे, जो संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने के एक या दो दिन बाद जारी किया जाएगा।

गोयल ने साथ ही बताया कि इस समझौते में किसी भी प्रकार के निवेश की प्रतिबद्धता नहीं है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि इस कानूनी समझौते से हमें अमेरिकी सामान पर शुल्क कम करने का अधिकार मिलेगा।

अग्रवाल ने कहा, ‘‘ भारतीय शुल्क में कमी केवल एक कानूनी समझौते के बाद ही होगी।’’

उन्होंने कहा कि भारतीय शुल्क, एमएफएन (सबसे तरजीही राष्ट्र) शुल्क हैं जबकि अमेरिकी आयात शुल्क, कार्यकारी शुल्क हैं।

गोयल ने कहा, ‘‘ हमें उम्मीद है कि हम चीजों को तेजी से आगे बढ़ा पाएंगे क्योंकि कानूनी समझौते के बाद हमें और भी रियायतें मिलेंगी।’’

सौदे के 500 अरब अमेरिकी डॉलर के खरीद वाले हिस्से के बारे में मंत्री ने कहा कि भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है, उसे देखते हुए देश को बड़ी मात्रा में ऊर्जा, डेटा सेंटर उपकरण और आईसीटी उत्पादों की आवश्यकता होगी।

मंत्री ने कहा, ‘‘ हमारी इस्पात उत्पादन क्षमता वर्तमान के 14 करोड़ टन से बढ़कर अगले कुछ वर्ष में करीब 30 करोड़ टन हो जाएगी। इसलिए, जब हमने अमेरिका से अपनी आवश्यकताओं का अनुमान लगाया तो हम कम से कम 500 अरब डॉलर के आंकड़े पर पहुंचे। हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि अगले पांच वर्ष में हम अमेरिका से कितनी मात्रा में इस्पात प्राप्त कर सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि केवल भारत की विमानों की मांग, बोइंग को दिए गए और अभी दिए जाने वाले लेकिन तैयार ऑर्डर की संख्या करीब 70-80 अरब डॉलर है।

गोयल ने कहा कि अगर इसमें इंजन और अन्य कलपुर्जे भी जोड़ दिए जाएं तो लागत शायद 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।

मंत्री ने साथ ही कहा कि बजट में डेटा केंद्रों के लिए भारी रियायतों की घोषणा की गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘ अब कल्पना कीजिए कि अगर हमें डेटा केंद्रों में 100-150 अरब डॉलर का निवेश मिलता है तो जाहिर है कि हमें उन डेटा केंद्रों के लिए उपकरणों की आवश्यकता होगी।’’

मंत्री ने कहा कि फरवरी, 2025 में दोनों देशों के बीच निर्धारित 500 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को निश्चित रूप से अमेरिका से निर्यात और खरीद में काफी वृद्धि करनी होगी।

उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ हुए इस समझौते के तहत जिन वस्तुओं को खरीदने का वादा किया है उनकी वर्तमान वैश्विक खरीद 300 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।

अमेरिका… तेल, एलपीजी, एलएनजी, विमान, आईसीटी उत्पाद, लैपटॉप, स्मार्टफोन और डेटा सेंटर उपकरण जैसी सभी वस्तुएं उपलब्ध करा सकता है जिन्हें भारत अन्य देशों से खरीद रहा है।

अग्रवाल ने कहा, ‘‘ अगले पांच वर्षों में ये खरीद 2,000 अरब डॉलर की होने वाली है। अगर हम अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद कर लेते हैं तो इससे हमारी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता और मजबूती ही बढ़ेगी।’’

संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे।

भाषा निहारिका अजय

अजय