(बरूण झा)
दावोस, 21 जनवरी (भाषा) विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में जहां वैश्विक नेता सुस्त आर्थिक वृद्धि और बढ़ते जलवायु जोखिमों पर चिंता जता रहे हैं, वहीं भारतीय प्रतिनिधिमंडल देश की मजबूत वृद्धि दर और पर्यावरण अनुकूल उपायों को प्रमुखता से पेश कर रहा है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित एक परिचर्चा में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंने सतत विकास और ग्रिड स्थिरता के लिए निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है।
जोशी ने बताया कि भारत ने डिजिटलीकरण और स्मार्ट मीटरिंग के जरिए अपने ग्रिड का आधुनिकीकरण शुरू कर दिया है, जिसने व्यवस्था को मजबूत किया है और नागरिकों को सशक्त बनाया है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे ही जल्द चौथी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, अब मुख्य आवश्यकता ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने की है।
‘ग्रिड स्थिरता’ का मतलब बिजली के नेटवर्क (ग्रिड) में उत्पादन (आपूर्ति) और खपत के बीच निरंतर संतुलन बनाए रखना है।
मंत्री ने कहा कि भारत निवेश पर शानदार रिटर्न प्रदान करता है, जिसे एक स्थिर नियामक व्यवस्था और सुसंगत नीतियों का समर्थन प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि इन्हीं नीतियों ने भारत को एक ‘नाजुक अर्थव्यवस्था’ से बदलकर वैश्विक वृद्धि के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने में मदद की है।
जोशी ने कहा कि कम गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए), नियंत्रित मुद्रास्फीति, बढ़ते उत्पादन और तेजी से सुधरते बुनियादी ढांचे के साथ भारत निवेश के लिए आकर्षक अवसर पेश कर रहा है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि देश के 42 प्रतिशत खनिज संसाधन झारखंड में हैं, जो देश के विकास के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने संसाधनों की रक्षा के साथ-साथ राज्य में समृद्धि लाने पर जोर दिया।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा, ‘गुजरात बड़े पैमाने पर पर्यावरण अनुकूल उपायों का उदाहरण पेश करता है। इसने अपनी औद्योगिक क्षमता को संतुलित विकास और संसाधन दक्षता के मॉडल में बदल दिया है।’
उन्होंने कहा कि गुजरात लंबे समय से भारत का ‘विकास इंजन’ रहा है, जो राष्ट्रीय जीडीपी, निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र में अपना बड़ा योगदान दे रहा है।
आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि भविष्य के लिए स्थिरता के हमारे चार प्रमुख स्तंभ हैं पारिस्थितिकी तंत्र को प्राथमिकता, व्यापार करने की गति, तीसरा, पर्यावरण अनुकूल रोजगार और कौशल में निवेश और नीतिगत निश्चितता एवं दक्षता।
सीआईआई ‘इंडिया सस्टेनेबिलिटी टास्कोफोर्स’ के अध्यक्ष और एलएसई में अतिथि प्रोफेसर जयंत सिन्हा ने सरकार से चार क्षेत्रों में सहयोग की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा, ‘पहला क्षेत्र रिपोर्टिंग और मानकों से जुड़ा है, दूसरा हरित वित्त एजेंसी का गठन, तीसरा ग्रिड का डिजिटलीकरण और चौथा कार्बन बाजारों का विस्तार करना है।’
भाषा सुमित रमण
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