डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान प्रणाली को कार्यशील बनाने की जरूरत: गोयल

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डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान प्रणाली को कार्यशील बनाने की जरूरत: गोयल

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  • Publish Date - March 26, 2026 / 10:07 PM IST,
    Updated On - March 26, 2026 / 10:07 PM IST

नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) भारत ने बृहस्पतिवार को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देशों से विवाद निपटान प्रणाली को पूरी तरह से कार्यशील बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। इसका कारण वर्तमान में यह व्यवस्था निष्क्रिय है जिससे देशों को विवादों के प्रभावी निपटान से वंचित होना पड़ रहा है।

कैमरून के याओन्डे में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी14) के पहले दिन वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ई-कॉमर्स व्यापार पर सीमा शुल्क रोक को आगे बढ़ाने के संबंध में सावधानीपूर्वक पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक निष्क्रिय विवाद निपटान प्रणाली ने सदस्य देशों को विवादों के प्रभावी निपटान से वंचित कर दिया है। हमें स्वचालित और बाध्यकारी विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करना होगा।’’

डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान व्यवस्था 2009 से ठीक से काम नहीं कर रही है क्योंकि अमेरिका ने अपीलीय निकाय में सदस्य देशों की नियुक्तियों में बाधा डाली है।

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देशों ने 1998 से ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन’ पर सीमा शुल्क नहीं लगाने पर सहमति व्यक्त की है। इस रोक को समय-समय पर मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों (एमसी) में बढ़ाया गया है। डब्ल्यूटीओ का मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 166 सदस्यों का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।

भारत ने सीमा शुल्क स्थगन के दायरे पर चर्चा करने की आवश्यकता पर बार-बार बल दिया है, क्योंकि इससे राजस्व पर प्रभाव पड़ता है।

चार दिवसीय मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 29 मार्च को समाप्त होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन को लेकर सीमा शुल्क पर स्थगन के दायरे के मामले में सदस्यों के बीच आम सहमति के अभाव में और इसके संभावित महत्वपूर्ण प्रभावों को देखते हुए, इस स्थगन के निरंतर विस्तार पर सावधानीपूर्वक पुनर्विचार की आवश्यकता है।’’

डब्ल्यूटीओ सुधारों पर मंत्री ने कहा कि आवश्यक सुधार एक पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-संचालित प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने चाहिए। इसमें विकास को केंद्र में रखा जाए और गैर-भेदभाव, आम सहमति आधारित निर्णय लेने और समानता जैसे मूलभूत सिद्धांतों को बनाए रखा जाए।

गोयल ने कृषि पर कहा कि खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक भंडारण, विशेष सुरक्षा उपाय और कपास पर स्थायी समाधान काफी समय से लंबित मुद्दे हैं और सदस्य देशों को ‘प्राथमिकता के आधार पर इन पर निर्णय करना चाहिए।’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक व्यापक मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध है जो वर्तमान और भविष्य की मछली पकड़ने की जरूरतों को संतुलित करे, गरीब मछुआरों की आजीविका की रक्षा करे और उचित एवं प्रभावी नियंत्रण एवं परिवर्तन उपायों को लागू करे।’’

गोयल ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) रूपरेखा में बहुपक्षीय परिणामों को शामिल करना आम सहमति पर आधारित होना चाहिए।

मंत्री ने कहा, “हम रचनात्मक रूप से इस बात के लिए प्रयासरत रहेंगे कि डब्ल्यूटीओ वैश्विक व्यापार का केंद्र बना रहे। हम इसमें सुधार करने का प्रयास करेंगे ताकि यह जवाबदेह बना रहे, विकास, समानता और समावेश के लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम हो और आम सहमति और बहुपक्षवाद पर आधारित होकर गरीब, कमजोर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के हितों की बेहतर सेवा कर सके।”

भाषा रमण अजय

अजय