नई सीपीआई आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार करेगी : सीईए नागेश्वरन

Ads

नई सीपीआई आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार करेगी : सीईए नागेश्वरन

  •  
  • Publish Date - February 12, 2026 / 06:29 PM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 06:29 PM IST

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने बृहस्पतिवार को कहा कि नई अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों को तैयार करने में उपयोग किए जाने वाले आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार करेगी।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने बृहस्पतिवार को नया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) जारी किया।

नई श्रृंखला में अधिक वस्तुएं और सेवाएं शामिल की गई हैं, जबकि वे वस्तुएं हटा दी गई हैं जिनका वर्तमान समय में उपयोग नहीं हो रहा है।

नागेश्वरन ने नई सीपीआई श्रृंखला पर एक संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा, ‘‘चूंकि अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का सामान और सेवाओं का समूह हाल के व्यय आंकड़ों के अनुरूप है, इसलिए इससे जो महंगाई के संकेत मिलेंगे वे आर्थिक परिस्थितियों के और अधिक करीब होंगे। इससे मौद्रिक और राजकोषीय नीति को समायोजित करने के लिए सूचना आधार में सुधार होगा।’’

उन्होंने कहा कि नई सीपीआई श्रृंखला, जिसमें सेवाओं और डिजिटल बाजारों का व्यापक समावेश है, नीति निर्माताओं को वास्तविक आय, उपभोग के रुझान और खरीद क्षमता का आकलन करने के लिए अधिक सटीक और ताजा आधार प्रदान करती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्विमासिक मौद्रिक नीति निर्णय लेते समय खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है।

उन्होंने कहा कि यदि सीपीआई में उतार-चढ़ाव कम हो जाता है, तो उससे जुड़े राजकोषीय व्यय खर्च, महंगाई भत्ता (डीए) तय करना और इंडेक्स बॉन्ड अधिक स्थिर और भरोसेमंद हो जाएंगे।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि नई श्रृंखला में खाद्य समूह का भारांश 2012 की सीपीआई में 45.86 प्रतिशत से घटकर 36.75 प्रतिशत हो गया है।

उन्होंने कहा कि यह रेस्तरां और सेवाओं जैसी अन्य श्रेणियों में कुछ वस्तुओं के पुनः आवंटन को भी दर्शाता है।

नागेश्वरन ने कहा, ‘‘आर्थिक दृष्टि से यह स्वास्थ्य, शिक्षा, आवागमन और संपर्क जैसे क्षेत्रों में खर्च में विविधता को दर्शाता है, जो एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था में देखा जाता है, जहां आय और जीवन स्तर बढ़ रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि खाद्य और पेय पदार्थों के समूह का कम भार मुख्य महंगाई दर को भी कम अस्थिर बना सकता है।

उन्होंने कहा, इस तरह का पुनर्संतुलन आम तौर पर आय वृद्धि, उत्पादकता लाभ और जीवन स्तर में सुधार से जुड़ा होता है।

नागेश्वरन ने कहा कि संशोधित सूची में यह दिखाया गया है कि उपभोग में सेवाओं की भूमिका बढ़ती जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह उपभोग माप को उत्पादन और रोजगार की उभरती संरचना के करीब लाता है, जहां सेवाएं आर्थिक गतिविधियों की बढ़ती हिस्सेदारी के लिए जिम्मेदार हैं।’

नागेश्वरन ने कहा कि नई श्रृंखला कीमतों के निर्धारण में डिजिटल माध्यम की बढ़ती भूमिका को भी मानती है और इससे राज्यों में महंगाई के शहरी और ग्रामीण स्वरूप को साथ ही विभिन्न उप-श्रेणियों और वस्तुओं के स्तर पर बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

भाषा योगेश अजय

अजय