सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश पर पूंजीगत लाभ कर से छूट के लिए अध्यादेश जारी

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सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश पर पूंजीगत लाभ कर से छूट के लिए अध्यादेश जारी

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  • Publish Date - June 5, 2026 / 01:37 PM IST,
    Updated On - June 5, 2026 / 01:37 PM IST

नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) सरकार ने रुपये पर दबाव को कम करने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में विदेशी निवेशकों को ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट दे दी है।

सरकार की पांच जून की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, आयकर अधिनियम में संशोधन करने के लिए अध्यादेश जारी किया है। इसके तहत एक अप्रैल से सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री, विनिमय या हस्तांतरण से होने वाली ब्याज आय एवं पूंजीगत लाभ पर कर छूट प्रदान की गई है।

वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह छूट एक अप्रैल से प्रभावी होगी। इसका मतलब है कि यह छूट सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के संबंध में एक अप्रैल को या उसके बाद एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों) को प्राप्त होने वाले किसी भी ब्याज या पूंजीगत लाभ पर लागू होगी।

विदेशी निवेशकों को वर्तमान में 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध शेयर और बॉन्ड पर 12.5 प्रतिशत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) देना होता है। इसके अलावा, सरकारी बॉन्ड से अर्जित ब्याज पर 20 प्रतिशत का ‘विदहोल्डिंग टैक्स’ (स्रोत पर कर कटौती) भी देना पड़ता है।

यह छूट विदेशी संस्थागत निवेशकों और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) पर लागू होगी। बशर्ते वे निर्धारित सूचना-खुलासा आवश्यकताओं का पालन करें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित इस अध्यादेश में बीआईएस को 1930 में स्थापित एवं स्विट्जरलैंड के बासेल स्थित एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें भारतीय कानून के तहत एफआईआई और सरकारी प्रतिभूतियों की मौजूदा वैधानिक परिभाषाओं का भी उल्लेख है।

राजपत्र अधिसूचना में कहा गया कि संसद का सत्र चालू नहीं होने तथा तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता के मद्देनजर संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति का उपयोग किया गया।

भारत को एक प्रमुख वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में मजबूत करने और पूंजी बाजार को गहरा करने की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, वित्त मंत्रालय ने भारत के बाहर रहने वाले लोगों (पीआरओआई) और एफपीआई के लिए निवेश में आसानी बढ़ाने एवं स्थिर दीर्घकालिक विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने के उद्देश्य से कई उपायों को पेश किया है।

इसमें कहा गया कि सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के तहत निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की सूची का विस्तार करने का निर्णय लिया है। इसमें 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली नई सरकारी प्रतिभूतियों के साथ-साथ सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड को भी शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा, सामान्य मार्ग के तहत निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए अल्पकालिक निवेश, कोष रखने की सीमा और व्यक्तिगत प्रतिभूति सीमा से जुड़े प्रतिबंध भी हटा दिए हैं। हालांकि, कुल मात्रात्मक निवेश सीमा यथावत रखी जाएगी, जो केंद्रीय सरकारी प्रतिभूतियों के बकाया स्टॉक का छह प्रतिशत और राज्य सरकारी प्रतिभूतियों (एसजीएस) का दो प्रतिशत है।

बयान के अनुसार, निवेश सीमा की उप-श्रेणियों सामान्य और दीर्घकालिक को भी क्रमशः सरकारी प्रतिभूतियों और एसजीएस में निवेश के लिए एक ही सीमा में मिला दिया जाएगा। ये उपाय एक सुचारू प्रतिफल में मदद करेंगे और पेंशन कोष, बीमा कंपनियों तथा सॉवरेन संपदा कोष जैसे दीर्घकालिक निवेशकों सहित स्थिर एवं नियमित विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करेंगे। साथ ही, इससे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ने की भी उम्मीद है।

इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के बीच विदेशी पूंजी आकर्षित करने और बाहरी वित्तपोषण को मजबूत करने के लिए कई उपायों की शुक्रवार को घोषणा की।

केंद्रीय बैंक ने पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के तहत पात्र सरकारी प्रतिभूतियों के दायरे का विस्तार करते हुए 15, 30 और 40 वर्ष के नए सॉवरेन बॉन्ड इसमें शामिल किए हैं।

आरबीआई ने सामान्य मार्ग के तहत निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए अल्पकालिक निवेश, कोष रखने की सीमा और व्यक्तिगत प्रतिभूति सीमा से जुड़े प्रतिबंध भी हटा दिए हैं।

केंद्रीय बैंक के उपायों तथा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर दी गई कर छूट से भारत के सॉवरेन ऋण बाजार में विदेशी भागीदारी बढ़ने और सरकार को कम ब्याज दर पर उधारी लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यह कदम रुपये को भी सहारा देगा, जो इस वर्ष कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की निकासी के कारण छह प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है।

बजट 2026-27 की घोषणा के अनुरूप, विदेश में रहने वाले लोगों (पीआरओआई) को अब पोर्टफोलियो निवेश योजना के तहत सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी साधनों में निवेश की अनुमति दी गई है, जो पहले केवल एनआरआई/ओसीआई के लिए उपलब्ध थी।

आरबीआई के अनुसार, इस योजना के तहत किसी एक कंपनी में व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए निवेश सीमा पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि सभी व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए कुल निवेश सीमा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दी गई है।

इसमें कहा गया कि यह अधिसूचना मौजूदा प्रणालियों का अनुकूल बनाकर विदेशी पोर्टफोलियो पूंजी जुटाने में मदद करेगी।

विदेशी कर्ज को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जुटाए गए बाह्य यानी विदेशों से वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) के लिए 30 सितंबर, 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा प्रदान करेगा।

इसके अलावा, अधिकृत डीलर बैंकों को एक अस्थायी सुविधा के तहत पात्र बनाया गया है, जिसके अंतर्गत आरबीआई 30 सितंबर, 2026 तक जुटाई गई तीन से पांच वर्ष की नई विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) जमा पर पूर्ण जोखिम बचाव से जुड़ी लागत वहन करेगा।

ये उपाय वैश्विक अस्थिरता के बीच टिकाऊ विदेशी पूंजी प्रवाह आकर्षित करने, बाहरी वित्तीय स्थितियों को सुदृढ़ बनाने एवं भारत के भुगतान संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए हैं।

भाषा निहारिका अजय

अजय