मुंबई, 10 जून (भाषा) भारतीय कंपनियों की विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश प्रतिबद्धताएं मई, 2026 में घटकर 4.49 अरब डॉलर रह गईं, जो अप्रैल, 2026 के 8.84 अरब डॉलर की तुलना में 49.02 प्रतिशत कम है। यह गिरावट मुख्य रूप से इक्विटी निवेश, विदेशी ऋण और गारंटी जारी करने में कमी के कारण दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बुधवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
हालांकि, सालाना आधार पर भारतीय कंपनियों की देश के बाहर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रतिबद्धताएं 34.6 प्रतिशत बढ़ी हैं। मई, 2025 में यह आंकड़ा 3.34 अरब डॉलर था, जो मई, 2026 में बढ़कर 4.49 अरब डॉलर हो गया।
आंकड़ों के अनुसार, विदेशों में किए गए इक्विटी निवेश में सबसे अधिक गिरावट देखी गई। मई में यह घटकर 1.25 अरब डॉलर रह गया, जबकि अप्रैल में यह 3.54 अरब डॉलर था। यानी इसमें लगभग 64.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
इसी तरह, भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में दिया गया कर्ज भी अप्रैल के 1.30 अरब डॉलर से घटकर मई में 63.2 करोड़ डॉलर रह गया।
विदेशी निवेश प्रतिबद्धताओं का सबसे बड़ा हिस्सा गारंटी का रहा, लेकिन इसमें भी कमी आई। मई में जारी गारंटी का मूल्य 2.61 अरब डॉलर रहा, जो अप्रैल के लगभग चार अरब डॉलर से करीब 35 प्रतिशत कम है। हालांकि, यह मई, 2025 के 1.12 अरब डॉलर की तुलना में काफी अधिक है।
मई के दौरान विदेशों में इक्विटी निवेश करने वाली प्रमुख भारतीय कंपनियों में इंडोविडा इंडिया सबसे आगे रही, जिसने 67.32 करोड़ डॉलर का निवेश किया। इसके अलावा टाटा इंटरनेशनल ने 13 करोड़ डॉलर, अरविंद एडवांस्ड मैटेरियल्स ने 5.8 करोड़ डॉलर और ओएनजीसी विदेश रोवुमा ने 3.11 करोड़ डॉलर का निवेश किया।
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अजय रमण
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