कोटा प्रावधानों का लाभ ले चुके अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी के पदों के पात्र नहींःमहाराष्ट्र कैबिनेट

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कोटा प्रावधानों का लाभ ले चुके अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी के पदों के पात्र नहींःमहाराष्ट्र कैबिनेट

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  • Publish Date - May 15, 2026 / 10:36 PM IST,
    Updated On - May 15, 2026 / 10:36 PM IST

मुंबई, 15 मई (भाषा) महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने आरक्षण संबंधी नीति पर मुहर लगा दी है जिसके अनुसार आरक्षित श्रेणियों के वे अभ्यर्थी जो प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु और शैक्षणिक योग्यता जैसी छूट का लाभ उठा चुके हैं, वे अनारक्षित श्रेणी के पदों पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

कांग्रेस ने हालांकि आरोप लगाया कि यह कदम ‘‘आरक्षण को कमजोर करने के छिपे एजेंडे’’ को दर्शाता है। विपक्षी पार्टी ने दावा किया कि यह निर्णय अप्रत्यक्ष तरीके से आरक्षण को कमजोर करने के एक व्यवस्थित प्रयास का हिस्सा है।

राज्य सरकार ने कहा कि इस नीति से अनारक्षित श्रेणी में योग्यता के आधार पर आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों के चयन के संबंध में अधिक स्पष्टता आएगी और आरक्षण के कार्यान्वयन में अधिक पारदर्शिता तथा एकरूपता सुनिश्चित होगी।

राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई नीति के तहत, आरक्षित श्रेणी के वे उम्मीदवार जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया के किसी भी चरण में आयु, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव या परीक्षा में दिए जाने वाले प्रयासों की संख्या के संदर्भ में कोई रियायत नहीं ली है (परीक्षा शुल्क में रियायत को छोड़कर), वे योग्यता के आधार पर अनारक्षित श्रेणी में चयन के लिए पात्र होंगे।

हालांकि, आरक्षित श्रेणियों के वे उम्मीदवार जिन्होंने आयु, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव या परीक्षा प्रयासों की संख्या में सरकार द्वारा प्रदान की गई किसी भी छूट का लाभ उठाया है, उन्हें उनके संबंधित आरक्षित श्रेणी के अंतर्गत गिना जाता रहेगा।

इसमें कहा गया है कि ऐसे उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी के पदों पर नियुक्ति का दावा करने के हकदार नहीं होंगे।

इसी बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नितिन राउत ने शुक्रवार को सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे पिछड़े समुदायों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) में अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष राउत ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया कि सरकार समानता की आड़ में मेधावी बहुजन छात्रों के साथ विश्वासघात कर रही है।

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री ने कहा, “संविधान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि आरक्षित श्रेणी का कोई उम्मीदवार योग्यता के आधार पर अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के बराबर अंक प्राप्त करता है, तो उसे अनारक्षित श्रेणी के तहत चयनित होने का पूरा अधिकार है। केवल आयु में छूट या शुल्क में छूट जैसी तकनीकी रियायतों का लाभ उठाने के कारण इस अधिकार से वंचित करना उनकी प्रतिभा और मेहनत का अपमान करने के समान है।’’

राउत ने आरोप लगाया कि आरक्षण को कमजोर करने का एक छिपा हुआ एजेंडा है और दावा किया कि यह निर्णय अप्रत्यक्ष तरीको से कोटे को कमजोर करने के एक व्यवस्थित प्रयास का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि पिछड़े समुदायों के छात्र अक्सर प्रतिकूल सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से उबरकर आगे बढ़ते हैं, और उन्हें संवैधानिक रूप से स्वीकृत रियायतों का उपयोग करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘योग्यता पर किसी विशेष वर्ग का एकाधिकार नहीं हो सकता। आरक्षित श्रेणी के छात्र भी उतनी ही मेहनत करते हैं, अक्सर कहीं अधिक कठिन परिस्थितियों में। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद उन्हें अनारक्षित श्रेणी की प्रतियोगिता से बाहर रखना घोर अन्याय है।’’

राउत ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय ने बार-बार इस सिद्धांत को बरकरार रखा है कि योग्य आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी की सीट के हकदार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह निर्णय न केवल संविधान विरोधी है, बल्कि न्यायिक मिसालों को भी कमजोर करता प्रतीत होता है।’’

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश