नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड के पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए सोमवार को एकीकृत आवेदन फॉर्म पेश किया। इसका उद्देश्य पंजीकरण के लिए शुरुआती और अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है।
नए ढांचे के तहत संभावित प्रायोजकों को अपनी वित्तीय स्थिति, स्वामित्व, संचालन व्यवस्था और नियामकीय रिकॉर्ड की विस्तृत जानकारी देनी होगी। जुलाई में अधिसूचित सेबी (म्यूचुअल फंड) विनियम, 2026 के तहत नई व्यवस्था लाई गई है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परिपत्र में कहा कि नए नियमों को देखते हुए म्यूचुअल फंड के पंजीकरण के लिए मौजूदा आवेदन फॉर्म को एकीकृत कर एक फॉर्म कर दिया गया है।
अभी किसी म्यूचुअल फंड के पंजीकरण की प्रक्रिया दो चरणों में होती है। पहले चरण में प्रायोजक को म्यूचुअल फंड के गठन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी जाती है और इसके लिए फॉर्म ‘ए’ में आवेदन किया जाता है। इसके बाद अंतिम पंजीकरण के लिए फॉर्म ‘सी’ और ‘डी’ जमा करने होते हैं।
हालांकि, संशोधित व्यवस्था में दोनों चरणों के लिए एक ही आवेदन फॉर्म निर्धारित किया गया है।
नए फॉर्म में प्रायोजक को शेयरधारिता, स्वामित्व संरचना, पूंजी ढांचे, शुद्ध संपत्ति और पिछले पांच वित्त वर्षों के ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण की जानकारी देनी होगी। इसके साथ, वित्तीय सेवा क्षेत्र में अनुभव, सहयोगी कंपनियों की विनियमित गतिविधियों तथा निदेशक मंडल एवं प्रमुख प्रबंधन अधिकारियों का ब्योरा भी देना होगा।
सेबी ने प्रायोजकों के लिए पात्रता के दो विकल्प रखे हैं। पहले विकल्प के तहत प्रायोजक का कम-से-कम पांच साल से वित्तीय सेवा कारोबार में होना और पिछले पांच वर्षों में सकारात्मक शुद्ध संपत्ति रखना जरूरी होगा। साथ ही वित्तीय सेवा कारोबार से लगातार पांच वर्षों में शुद्ध लाभ और इस अवधि में कम-से-कम 10 करोड़ रुपये का औसत वार्षिक शुद्ध लाभ होना चाहिए।
दूसरे विकल्प के तहत ऐसे प्रायोजकों को विकल्प दिया गया है जो पहली श्रेणी की लाभप्रदता और अनुभव संबंधी शर्तें पूरी नहीं करते। इसके तहत प्रस्तावित परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) की पंजीकरण के समय शुद्ध संपत्ति कम-से-कम 150 करोड़ रुपये होनी चाहिए, जिसे प्रायोजक उपलब्ध कराएगा।
सेबी ने पंजीकरण प्रक्रिया में नियामकीय और पृष्ठभूमि जांच को भी शामिल किया है। आवेदकों को अपने और संबंधित पक्षों के खिलाफ हुई नियामकीय कार्रवाई, जुर्माने और मुकदमों की जानकारी देनी होगी। संबंधित व्यक्तियों और अंतिम लाभकारी स्वामियों के लिए ‘उचित एवं उपयुक्त’ घोषणा भी जरूरी होगी।
नए ढांचे में निवेशक संरक्षण और आंतरिक संचालन व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। आवेदकों को शिकायत निवारण, अनुपालन और हितों के टकराव से जुड़ी व्यवस्थाओं का विवरण देना होगा। प्रस्तावित एएमसी को कारोबारी योजना के साथ अपनी बुनियादी व्यवस्था और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी प्रणालियों की जानकारी भी देनी होगी।
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प्रेम अजय
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