नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) देश के वाणिज्यिक वाहन (सीवी) उद्योग में सीएनजी/ एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) जैसे वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2029-30 तक बढ़कर 40-45 प्रतिशत हो सकती है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने सोमवार को यह संभावना जताई।
इक्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में वाणिज्यिक वाहन उद्योग में वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत रही। वर्ष 2029-30 तक सीवी उद्योग में सीएनजी/एलएनजी की हिस्सेदारी बढ़कर 30-35 प्रतिशत और ईवी की हिस्सेदारी 10-15 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी मुख्य रूप से मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहन (एमएचसीवी) श्रेणी के बस खंड के कारण होगी।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि सीवी क्षेत्र में सीएनजी/एलएनजी की हिस्सेदारी लगातार बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 25 प्रतिशत हो गई है, जो वित्त वर्ष 2020-21 में महज सात प्रतिशत थी। यह पारंपरिक पेट्रोलियम ईंधन के एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभरा है।
वहीं, घरेलू वाणिज्यिक वाहन उद्योग में डीजल की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020-21 के 86 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 67 प्रतिशत रह गई है। उत्सर्जन मानकों के सख्त होने और सीएनजी, एलएनजी एवं ईवी जैसी वैकल्पिक ईंधन प्रौद्योगिकियों की कुल स्वामित्व लागत (टीसीओ) घटने से यह बदलाव आया है।
इक्रा ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में वाणिज्यिक वाहनों में पेट्रोल की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम रही और इसका उपयोग मुख्य रूप से हल्के वाणिज्यिक वाहन (एलसीवी) खंड तक ही सीमित रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘पीएम ई-ड्राइव’ योजना के तहत दिए गए प्रोत्साहनों ने इलेक्ट्रिक ट्रक की खरीद लागत को काफी कम किया है, जिससे भविष्य में ई-ट्रकों की स्वीकार्यता में तेजी आने की उम्मीद है।
इक्रा की वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख किंजल शाह ने कहा, ‘‘वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर के बावजूद घरेलू वाणिज्यिक वाहन उद्योग को ऊंची शुरुआती लागत और बुनियादी ढांचे की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।’’
उन्होंने कहा कि चार्जिंग एवं ईंधन ढांचे की उपलब्धता, तय की जाने वाली दूरी को लेकर चिंता, बिक्री एवं सेवा नेटवर्क, मार्गों की प्रकृति और परिचालन जरूरतें भी वैकल्पिक ईंधनों की स्वीकार्यता की गति को तय करेंगी।
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