वाशिंगटन, 30 जनवरी (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फेडरल रिजर्व के पूर्व गवर्नर केविन वार्श को अमेरिकी केंद्रीय बैंक का अगला चेयरमैन नामित करने की घोषणा की।
अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट से इस नामांकन की मंजूरी मिल जाने की स्थिति में 55 वर्षीय वार्श अपना पद संभाल लेंगे। मौजूदा चेयरमैन जेरोम पावेल का कार्यकाल मई में समाप्त होने वाला है।
वार्श इसके पहले भी फेडरल रिजर्व से जुड़े रह चुके हैं। वह 2006 से 2011 तक फेड रिजर्व के शासकीय मंडल में शामिल थे और 35 वर्ष की उम्र में इस पद पर नियुक्त होने वाले सबसे युवा गवर्नर बने थे।
वार्श इस समय दक्षिणपंथी रुझान वाले हूवर इंस्टिट्यूशन में फेलो हैं और स्टैनफोर्ड ग्रैजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में पढ़ाते हैं।
फिलहाल वार्श को फेडरल रिजर्व के शासकीय मंडल में शामिल किया जाएगा और सीनेट की मंजूरी मिलने के बाद ट्रंप मई में उन्हें केंद्रीय बैंक के चेयरमैन पद पर पदोन्नत कर देंगे।
विश्लेषकों के मुताबिक, वार्श की नियुक्ति फेडरल रिजर्व की नीतिगत स्वतंत्रता को लेकर बहस को तेज कर सकती है। ट्रंप लंबे समय से ब्याज दरों में तेज कटौती की वकालत करते रहे हैं और इस बात पर उन्होंने मौजूदा चेयरमैन पावेल की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि ब्याज दरें कम होने से आर्थिक वृद्धि रफ्तार पकड़ेगी और 38 लाख करोड़ डॉलर के सरकारी कर्ज पर ब्याज के बोझ में कमी आएगी।
हालांकि, वार्श की परंपरागत छवि एक ‘हॉक’ यानी मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरों का समर्थन करने वाले विशेषज्ञ की रही है। उन्होंने 2008-09 की वैश्विक वित्तीय मंदी के दौरान अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति पर भी आपत्ति जताई थी।
हालांकि, हाल के वर्षों में वार्श ने अपने भाषणों और लेखों में कम ब्याज दरों के समर्थन के संकेत दिए हैं।
ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद वार्श ने उनकी आर्थिक नीतियों का समर्थन किया है। जनवरी 2025 में ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में प्रकाशित एक लेख में उन्होंने कहा था कि विनियमन में ढील और सरकारी खर्च में कटौती से मुद्रास्फीति का दबाव घटेगा, जिससे फेड रिजर्व को दरों में कटौती का अवसर मिलेगा।
फेड चेयरमैन का पद आर्थिक जगत में वैश्विक स्तर पर सबसे प्रभावशाली पदों में से एक माना जाता है। फेड की नीतियां अमेरिका में मुद्रास्फीति, रोजगार, बैंकिंग नियमन और कर्ज की लागत को प्रभावित करती हैं और इनका परोक्ष प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिलता है।
एपी प्रेम प्रेम अजय
अजय