Reported By: Suman Pandey
,रायपुरः Akhil Bhartiya Agrawal Sammelan: संस्कृति की रक्षा और देश की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान में अग्रवाल समाज की अहम भूमिका रही है, लेकिन मगर समाज का ठेकेदार बनकर कुछ लोग अपनी जेब भरने का काम कर रहे हैं। अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन नाम का एक ऐसा ही संगठन है, जिसकी आड़ में जमकर हेराफेरी की गई है। इस संगठन के अध्यक्ष पर सैकड़ो किलो चांदी, करोड़ों रुपए और अरबों की जमीन गबन करने का आरोप है।
दरअसल, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन नाम का संगठन हरियाणा से संचालित होता है। इस संगठन में छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, असम, बंगाल, पंजाब, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के अग्रवाल समाज के कारोबारी और समाज सेवक जुड़े हुए हैं। इस संगठन के वर्तमान में अध्यक्ष गोपाल शरण गर्ग पर संस्था को दान की गई सैकड़ों किलो चांदी, करोड़ों रुपए और अरबों की जमीन गबन करने का आरोप है। इतना ही नहीं अपने कार्यकाल को गोपाल शरण में अवैध तरीके से बढ़ा लिया है। अपने रिश्तेदारों को संगठन में पदाधिकारी बनाकर एक अवैध बैठक कर ली। यही नहीं बल्कि संगठन की नियमावली में अपने मन मुताबिक बदलाव करके अपनी सत्ता चलाए हुए हैं।
Akhil Bhartiya Agrawal Sammelan: गोपाल शरण गर्ग के काले कारनामों का खुलासा करते हुए रायपुर के रहने वाले संगठन के आजीवन सदस्य सतनारायण मित्तल ने बताया कि गोपाल शरण गर्ग वर्ष 2010 में अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के सदस्य बने थे। सुरेंद्र गुप्ता के कार्यकाल के 2016 में वे चुनाव के जरिए अध्यक्ष बने। नियम के मुताबिक उन्हें 6 वर्ष तक उन्हें अध्यक्ष रहना था, लेकिन साल 2024 में उन्होंने अवैध तरीके से एक मीटिंग बुलाकर अपना कार्यकाल अवैध तरीके से बढ़ा लिया। उन्होंने इसी वर्ष 25 अप्रैल को चुनाव की तारीख की घोषणा की, लेकिन ना तो मतदाताओं को खबर दी गई और ना ही कोई आम सभा बुलाई गई। उन्होंने चुनाव अधिकारी की भी जानकारी नहीं दी है। चुनाव अधिकारी कौन होगा, किसे वोट देने का अधिकार होगा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि संगठन के सदस्यों की सहमति के बिना ही खुद को अध्यक्ष बनाए रखने के लिए नियमावली में संशोधन कर लिया है।
सत्यनारायण मित्तल ने अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन संगठन से जुड़े दस्तावेज भी IBC24 को दिखाए हैं। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि संगठन की मैगजीन में कहा गया है कि हरियाणा के अग्रोहा में कुलदेवी महालक्ष्मी मंदिर बनाया जा रहा है। इस मंदिर को तैयार करने के नाम पर देशभर से अग्रवाल समाज के लोगों से लाखों रुपए का नगद चंदा लिया गया। किसी ने पांच तो किसी ने 10 और 11 लाख रुपए तक चंदा दिया है। हैरान करने वाली बात ये है कि चंदे की इस रकम को संस्था के अकाउंट में नहीं दिखाया गया, बल्कि रसीद काटी गई और बाद में दस्तावेजों को जला दिया गया। महालक्ष्मी मंदिर में प्रतिमा और भवन में चांदी लगाने के नाम पर चांदी का भी दान ली गया। रसीद के मुताबिक किसी ने 3 तो किसी ने 5 किलो तक चांदी का दान गोपाल शरण गर्ग को दिया। इस तरह से 200 किलो से ज्यादा चांदी दान में आई, लेकिन ये चांदी भी संगठन के आधिकारिक खातों में दर्ज नहीं है। खबर है कि बड़ी मात्रा में चांदी को बेचकर हवाला के जरिए रुपए इधर से उधर कर दिए गए। असम संगठन से मिली एक रसीद में 75 लाख रुपए का लेनदेन हवाला के जरिए करने की बात लिखी है।
आरोप है कि खुद को अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन का अध्यक्ष बताकर गोपाल शरण गर्ग ने देश भर में अग्रवाल समाज के लोगों को धोखे में रखकर उनसे बड़ी रकम और जेवरात दान में लिए और हड़प लिया। साथ ही संस्था के लोगों को धोखे में रखकर अवैध चुनाव की घोषणा भी कर दी गई है। समाज को इस तरह अंधेरे में रखकर काली कमाई करने वाले गोपाल शरण गर्ग के खिलाफ सख्त जांच की मांग की जा रही है। ये भी बताया जा रहा है कि गोपाल शरण गर्ग ने हरियाणा सरकार के मंत्रियों को धोखे में रखकर अपना प्रभाव जमाने का काम किया है। सैकड़ों किलो चांदी के अलावा करोड़ों रुपए की जमीन और करोड़ों रुपए नकदी का घोटाला करने वाले गोपाल शरण गर्ग के खिलाफ सख्त जांच की जरूरत है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सकें।