Baloda Bazar Double Murder Verdict: छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी हत्यारे को डबल आजीवन कारावास की सजा.. अवैध संबंध से जुड़ा है मामला, काँप उठा था पूरा प्रदेश..

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Baloda Bazar Double Murder Verdict: बलौदाबाजार डबल मर्डर केस में आरोपी को डबल उम्रकैद, मां-बेटी की हत्या पर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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  • Publish Date - April 11, 2026 / 12:12 PM IST,
    Updated On - April 11, 2026 / 12:12 PM IST

Baloda Bazar Double Murder Verdict ||

HIGHLIGHTS
  • बलौदाबाजार में मां-बेटी हत्याकांड में आरोपी को डबल उम्रकैद की सजा
  • अवैध संबंध के चलते दिलहरण कश्यप ने धारदार हथियार से की थी हत्या
  • कोर्ट ने दोनों सजाएं अलग-अलग भुगतने का ऐतिहासिक आदेश सुनाया

बलौदा बाजार: करीब दो साल पहले जिले में सामने आए एक जघन्य दोहरे हत्याकांड पर अदालत ने अनोखा फैसला सुनाया है। प्रदेश के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी हत्यारे को डबल आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। (Baloda Bazar Double Murder Verdict) पूरा मामला मां-बेटी की हत्या से जुड़ा है। न्यायालय ने अपने फैसले से समाज को बड़ा संदेश देते हुए एक मिसाल पेश की है।

माँ-बेटी की धारदार हथियार से हत्या

दरअसल, बलौदाबाजार जिले के भदरा गांव में 28 जुलाई 2024 को पुलिस ने मां और बेटी की लाश बरामद की थी। दोनों ही शव जली हुई अवस्था में मिले थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि मृतका संतोषी साहू और उसकी बेटी ममता साहू पर किसी धारदार हथियार से वार कर उनकी हत्या की गई थी। हत्यारे ने घर के मुखिया की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था।

जब बलौदाबाजार पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की, तो कई बड़े खुलासे सामने आए। पुलिस ने संबंधों और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए पाया कि मृतका संतोषी का प्रेम संबंध दिलहरण कश्यप नाम के युवक से था। (Baloda Bazar Double Murder Verdict) इसी अवैध संबंध ने पुलिस का ध्यान खींचा। मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया कि इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिलहरण कश्यप ने ही दिया है। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से ठीक पहले संतोषी और दिलहरण के बीच लंबी फोन बातचीत हुई थी। हालांकि, तब तक दिलहरण मौके से फरार हो चुका था।

दिलहरण कश्यप तक पहुंची पुलिस

पुलिस ने जब अपनी तलाश तेज की तो संदिग्ध दिलहरण को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान पहले तो वह टालमटोल करता रहा, लेकिन सख्ती बरतने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया और पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने धारदार टंगिया और खून से सने कपड़े भी बरामद किए, जो इस मामले में अहम सबूत साबित हुए। इसके अलावा, करीब एक दर्जन गवाहों ने भी संतोषी और दिलहरण के बीच संबंध की पुष्टि की।

जानें किन धाराओं के तहत मिली सजा

बलौदाबाजार पुलिस की कड़ी मेहनत और आरोपी को सख्त सजा दिलाने की दृढ़ इच्छा ने इस मामले में सफलता दिलाई। सरकारी वकील की मजबूत दलीलों और प्रभावी पैरवी के चलते आरोपी को कठोर सजा मिलना सुनिश्चित हुआ। इस मामले में फैसला अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार वर्मा ने सुनाया। (Baloda Bazar Double Murder Verdict) उन्होंने आरोपी दिलहरण कश्यप को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 332(क) और धारा 103 (दो बार) के तहत दोषी करार देते हुए डबल आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

दो आजीवन कारावास का मतलब है कि आरोपी को दोनों सजाएं अलग-अलग भुगतनी होंगी। इस फैसले के बाद आरोपी को किसी प्रकार की राहत मिलने की संभावना बेहद कम हो गई है।

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Q1. बलौदाबाजार हत्याकांड में आरोपी को क्या सजा मिली?

अदालत ने आरोपी दिलहरण कश्यप को दोहरे हत्याकांड में डबल आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

Q2. इस हत्याकांड की वजह क्या थी?

पुलिस जांच में अवैध संबंध और विवाद को इस जघन्य हत्या का मुख्य कारण बताया गया।

Q3. डबल आजीवन कारावास का क्या मतलब है?

इसका मतलब आरोपी को दो अलग-अलग आजीवन सजाएं पूरी करनी होंगी, राहत की संभावना कम।