Naxal Reverse sterilization News : काश! पहले होते हमारे बच्चे’… मुख्यधारा में लौटने के बाद पूर्व नक्सलियों का छलका दर्द, बताया जंगल में बाप बनने पर क्यों था खौफनाक पहरा

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पुनर्वास के बाद पूर्व माओवादियों को रिवर्स नसबंदी की सुविधा दी जा रही है, जिससे वे सामान्य जीवन में लौटकर संतान सुख प्राप्त कर सकें। अब तक दर्जनों मामलों में यह प्रक्रिया सफल रही है।

  • Reported By: Naresh Mishra

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  • Publish Date - April 22, 2026 / 12:03 PM IST,
    Updated On - April 22, 2026 / 12:03 PM IST

Naxal Reverse sterilization News / Image Source : SCREENGRAB

HIGHLIGHTS
  • पूर्व माओवादियों का पुनर्वास और नई शुरुआत
  • रिवर्स नसबंदी से संतान सुख की संभावना
  • दर्जनों सफल मेडिकल केस सामने आए

बस्तर: Naxal Reverse sterilization News  कभी संघर्ष और असुरक्षा के बीच घने जंगलों में अपने पारिवारिक जीवन और संतान सुख से वंचित रहे माओवादी अब सुख के साथ बस्तर में नई जिंदगी जी रहे हैं। माओवादी संगठन में शादी तो होती थी, लेकिन बच्चे पैदा करने पर मनाही थी। इसके लिए अक्सर पुरुष नक्सलियों की नसबंदी कर दी जाती थी, जिससे वह संगठन में बच्चों को जन्म ना दे सके और परिवार के मोह में ना फंसे। माओवादियों के इस नसबंदी को सरकार ने खत्म करने और पीड़ित माओवादियों का रिवर्स नसबंदी कर रही है। अब तक 27 लोगों का सफल ऑपरेशन भी हुआ है और अब उनके बच्चे भी हैं। वहीं कई माओवादियों ने रिवर्स नसबंदी की इच्छा जाहिर की है।

56 माओवादियों के रिवर्स नसबंदी ऑपरेशन सफल

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि माओवादी संगठन में रहते हुए यदि किसी माओवादी का नसबंदी माओवादी डॉक्टरों के द्वारा की जाती है, तो उनके पुनर्वास के बाद रिवर्स नसबंदी की सुविधा भी दी जा रही है। अब तक 56 माओवादियों का नसबंदी खत्म करने का ऑपरेशन करवाया जा चुका है और इनमें 27 माओवादी संतान सुख के साथ आनंदपूर्वक पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। वहीं जिन्होंने हाल ही में पुनर्वास किया है, उन माओवादियों ने भी नसबंदी खोलने की इच्छा जाहिर की है, जिनके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

संगठन में बच्चों को बाधा मानते हैं माओवादी

आईजी ने बताया कि माओवादी मानते हैं कि बच्चे संगठन के लिए बाधा होते हैं। जंगल में उन्हें जीवन बिताने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जंगल, पहाड़, नदी-नालों को पार करने में दिक्कतें होती हैं। वहीं जवानों के ऊपर हमला करने और अन्य नक्सल गतिविधियों को भी करने में बच्चों का होना या महिला माओवादियों का गर्भवती होना संगठन के लिए काफी नुकसानदायक होता है।

( Naxali Bacche Kyun Nahi Karte )सरेंडर करने के बाद रिवर्स नसबंदी की मांग

रिवर्स नसबंदी कराए पुनर्वासित माओवादी ने बताया कि सरेंडर करवाने के बाद पुलिस अधिकारियों से यह मांग थी कि उनके नसबंदी का दोबारा ऑपरेशन करवाया जाए, ताकि उन्हें संतान की प्राप्ति हो सके। दूसरे के बच्चे को देखकर उन्हें भी एहसास होता है कि उनका भी बच्चा ऐसा ही होता। उनके बच्चे होते तो उनके साथ हंसते-खेलते रहते। इसीलिए बहुत दुख होता था। लेकिन पुनर्वास करने के बाद नसबंदी का रिवर्स ऑपरेशन कराया गया और संतान की प्राप्ति हुई। अब ऐसा लगता है कि उन्हें नई जिंदगी मिली है।

नसबंदी के बाद किया था प्रेम विवाह

DVCM सोमडु पोड़ियाम ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पुनर्वास किया है और नक्सल संगठन में नसबंदी कराने के बाद प्रेम विवाह किया था। लेकिन अब इच्छा यह है कि उनके नसबंदी का रिवर्स ऑपरेशन कराया जाए, ताकि नसबंदी खुलवाकर वह सामान्य जीवन जी सकें। इधर नक्सल संगठन में नसबंदी कराने वाले माओवादी डॉक्टर सुखलाल जुर्री ने बताया कि वे करीब 15-20 सालों तक नक्सल संगठन में सक्रिय रहे।

महिलाओं की नहीं की जाती नसबंदी

माओवादी डॉक्टर सुखलाल जुर्री ने बताया कि उन्होंने सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज किया, वहीं सर्जरी का कार्य भी किया। इसके अलावा शादी की इच्छा जाहिर करने वाले पुरुष माओवादियों का नसबंदी भी किया गया। नक्सल संगठन में केवल पुरुष माओवादियों का ही नसबंदी किया जाता है, महिलाओं का नसबंदी नहीं किया जाता है। नक्सल संगठन में 2-3 सालों से ही नसबंदी का कार्य किया गया। इन 2-3 सालों में करीब 10-15 माओवादियों का नसबंदी किया गया है।

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रिवर्स नसबंदी क्यों की जा रही है?

पूर्व माओवादियों को पुनर्वास के बाद सामान्य पारिवारिक जीवन और संतान सुख देने के लिए यह प्रक्रिया की जा रही है।

अब तक कितने ऑपरेशन सफल हुए हैं?

अब तक दर्जनों मामलों में रिवर्स नसबंदी के सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं, जिनमें कई लोग संतान सुख प्राप्त कर चुके हैं।

क्या यह प्रक्रिया सभी के लिए अनिवार्य है?

नहीं, यह केवल उन्हीं पूर्व माओवादियों के लिए है जो पुनर्वास के बाद अपनी इच्छा से यह प्रक्रिया कराना चाहते हैं।