मंत्री हैं कि मिलते नहीं… क्या इस टकराव से प्रभावित होगा राज्य का हित?

मंत्री हैं कि मिलते नहीं... क्या इस टकराव से प्रभावित होगा राज्य का हित?! Central and CG Government Face to Face on Paddy Matter

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  • Publish Date - November 16, 2021 / 11:42 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:59 PM IST

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रायपुर: Central and CG Government Face to Face बीते दिनों छत्तीसगढ़ के खाद्य मंत्री धान खरीदी से जुड़े कुछ मुद्दों और राज्य हित की कुछ मांगों को लेकर केंद्रीय मंत्री से मिलने दिल्ली गए थे, लेकिन उन्हें केंद्रीय मंत्री से मुलाकात का वक्त ही नहीं मिल सका। इस बात पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने केंद्र और केंद्रीय मंत्रियों पर तल्ख टिप्पणी की है। कांग्रेस नेताओँ का आरोप है कि केंद्र राज्य के साथ लगातार सौतेला व्यवहार कर रहा है। जबकि भाजपा का कहना है कि प्रदेश सरकार बेवजह का टकराव पैदा कर की कोरी सियासत कर रही है।

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Central and CG Government Face to Face कुछ इन शब्दों और नाराजगी भरे लहजे में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार और उसके मंत्रियों पर अहंकार में डूबे होने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री से जब केंद्रीय मंत्रियों के राज्य के कैबिनेट मंत्रियों को समय ना देने के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों का घमंड सातवें आसमान पर है। यदि वे राज्य के मंत्रियों को मिलने का समय नहीं दे रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि उनके जाने का वक्त आ गया है। हिमाचल, हरियाणा और कर्नाटक की जनता ने तो उन्हें जवाब दे भी दिया है।

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दरअसल, पिछले दिनों राज्य के खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने दिल्ली जाकर धान और उसना चावल खरीदी के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री के सामने राज्य की मांग रखनी चाही थी, लेकिन उन्हें केंद्रीय मंत्री की ओर से मिलने का वक्त ही नहीं मिला। इस बात पर राज्य सरकार आक्रोष में है। हालांकि, भाजपा नेता को इसमें केंद्र की कोई गलती नजर नहीं आती है। उल्टे वो प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर बेवजह राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं।

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पहले धान खरीदी पर राज्य सरकार को बोनस ना देने देना, फिर सेंट्रल पूल कोटे में 60 की बजाय 40 लाख मीट्रिक टन चावल की खरीदी, राज्य को एथेनॉल प्लांट स्थापित करने की अनुमति ना देना, और अब इस साल उसना चावल न खरीदने के केंद्र के आदेश। इन मुद्दों पर राज्य और केंद्र के बीच टकराव खुलकर सामने आ चुका है। इसके अलावा, पिछले तीन सालों में राज्य के हक का GST समेत दूसरे मदों का करीब 13 हजार करोड़ रुपए ना देने को लेकर भी राज्य सरकार केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर चुका है। सवाल ये इस टकराव से क्या राज्य का हित प्रभावित होगा?

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