Reported By: Abhishek Soni
,अंबिकापुर। CG Crime News: पति-पत्नी के रिश्ते की नींव विश्वास पर टिकी होती है, लेकिन बदलती जीवनशैली, मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच रिश्तों में पनप रहा शक अब जानलेवा साबित हो रहा है। सरगुजा रेंज में चरित्र शंका के चलते हत्या की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में चरित्र संदेह के कारण 20 लोगों की हत्या हुई, जबकि वर्ष 2026 में अब तक ऐसे 11 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
CG Crime News: आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में सरगुजा जिले में चरित्र शंका के कारण 9, जशपुर में 5, सूरजपुर में 3, बलरामपुर में 2 और एमसीबी में 1 हत्या हुई। वहीं वर्ष 2026 में अब तक बलरामपुर में 4, सूरजपुर और एमसीबी में 2-2, जबकि सरगुजा, जशपुर और कोरिया में एक-एक हत्या का मामला दर्ज हुआ है। अधिकांश मामलों में पति द्वारा पत्नी की हत्या किए जाने की बात सामने आई है। सरगुजा रेंज के आईजी दीपक कुमार झा का कहना है कि चरित्र संदेह से जुड़े मामलों में अक्सर आरोपी आवेश में आकर वारदात को अंजाम दे देते हैं। उन्होंने बताया कि जहां भी ऐसे विवादों की जानकारी मिलती है, वहां पुलिस स्तर पर काउंसिलिंग कराने का प्रयास किया जाता है, ताकि रिश्तों को टूटने से बचाया जा सके।
रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट की तस्वीर महिला सेल और परिवार परामर्श केंद्र के आंकड़ों में भी दिखाई देती है। वर्ष 2025 में सरगुजा रेंज में 1,560 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 1,056 मामलों में काउंसिलिंग कराई गई और 593 दंपतियों के बीच समझौता कराया गया। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 879 शिकायतें सामने आई हैं। इनमें 592 मामलों में काउंसिलिंग जारी है, जबकि 341 मामलों में समझौता हो चुका है। इन मामलों में बड़ी संख्या चरित्र संदेह से जुड़े विवादों की बताई गई है। परिवार परामर्श केंद्र की सलाहकार मीरा शुक्ला के अनुसार, अधिकांश मामलों में पति-पत्नी के बीच लगाए जाने वाले आरोपों के ठोस प्रमाण नहीं होते। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और आपसी संवाद की कमी के कारण संदेह पैदा होता है, जो धीरे-धीरे गंभीर विवाद, एफआईआर और कई बार हत्या जैसे जघन्य अपराध का रूप ले लेता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पति-पत्नी के बीच समय पर संवाद, आपसी विश्वास और आवश्यकता पड़ने पर परिवार परामर्श की मदद ली जाए तो कई परिवारों को टूटने और कई जिंदगियों को खत्म होने से बचाया जा सकता है। सरगुजा रेंज के ताजा आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि रिश्तों में बढ़ता अविश्वास अब केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है।