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CG Religious Freedom Bill: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण कराने वालों की अब खैर नहीं! विधानसभा में पारित हुआ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026, सदन में लगे जय श्री राम के नारे
रायपुरःCG Religious Freedom Bill:छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश किया गया। प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस बिल को सदन के समक्ष रखा। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस देखने को मिली। इस पर विपक्ष ने आपत्ति जताते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया है। विपक्ष की अनुपस्थिति के बीच यह विधेयक विधानसभा में पारित हो गया है।
CG Religious Freedom Bill गृह मंत्री विजय शर्मा ने चर्चा के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा रिकॉर्ड में यह दर्ज किया जाना चाहिए कि यह कांग्रेस का बहिर्गमन नहीं, बल्कि पलायन है। (Chhattisgarh Dharmik Swatantrata Bill 2026) उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर न तो सुनना चाहती है और न ही बोलना, क्योंकि इससे उनका वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। विजय शर्मा ने कहा कि संविधान में स्पष्ट है कि सार्वजनिक व्यवस्था धर्म की स्वतंत्रता से ऊपर है। उन्होंने कहा कि कोई भी अदालत में जाए, यह विधेयक संविधान विरोधी नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1968 के धर्म स्वतंत्रता कानून को पिछली सरकारों ने कमजोर बना दिया था। विजय शर्मा ने कहा कि, जो भारत माता की जय बोले वो हिंदू है। जो इस माटी को अपना देश न माने, उनसे हमको भी दिक्कत है। उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सली भी वर्ग संघर्ष पैदा नहीं कर सके, लेकिन धर्मांतरण करने वालो ने वर्ग संघर्ष पैदा कर दिया। नक्सली की तरह हम एक दिन धर्मांतरित लोग की घर वापसी कराएंगे।
प्वाइंट्स में समझें क्या है छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026?
CG Religious Freedom Bill प्रस्तावित कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित होगा।
यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पूर्व सूचना देनी होगी। प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।
विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।सोशल मीडिया के ज़रिए भी प्रलोभन दिया जाएगा उसे भी अपराध माना जाएगा
कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।