रायपुर, 30 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के कोरिया जिले में एक व्यवसायी समेत तीन लोगों की हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच के लिए मंजूरी दे दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
इस महीने की शुरुआत में रेत खनन के कारोबार को लेकर दो परिवारों के बीच लंबे समय से चली आ रही रंजिश जानलेवा हो गई थी।
राज्य के गृह विभाग ने सीबीआई जांच के संबंध में मंगलवार को एक अधिसूचना जारी की।
अधिसूचना में कहा गया है, ”दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 (अधिनियम 25 सन् 1946) की धारा छह के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, थाना-सोनहत, जिला – कोरिया, छत्तीसगढ़ में दर्ज अपराध क्रमांक 65/2026 धारा 126(2), 296, 351(3), 115(2), 3(5) भारतीय न्याय संहिता एवं अपराध क्रमांक 66/2026 धारा 190, 191(2), 191(3), 109, 324, 103(1), 326(जी) भारतीय न्याय संहिता के अनुसंधान हेतु दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना के सदस्यों की शक्तियों और क्षेत्राधिकार का विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में करने की सहमति प्रदान की जाती है।”
इनमें से एक मामला (अपराध संख्या 66/2026) कटगोड़ी गांव के करीब भरत सिंह (लगभग 60), वीरेंद्र प्रताप सिंह (32) और नागेंद्र सिंह (53) की हत्या से जुड़ा है। इस घटना में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
पुलिस के अनुसार, यह हिंसा सिंह और त्रिपाठी परिवारों के बीच रेत खनन के काम को लेकर लंबे समय से चली आ रही रंजिश का नतीजा थी।
दोनों परिवार कटगोड़ी के पास नागोई गांव के रहने वाले हैं। हालांकि सिंह परिवार अब बैकुंठपुर में रहता है, लेकिन वे इस इलाके में रेत खनन और पत्थर तोड़ने का कारोबार संचालित करते हैं।
पुलिस ने बताया कि 16 जून को दोनों परिवारों के सदस्यों के बीच झगड़े के बाद तनाव बढ़ गया था। पुलिस ने बताया कि उसी रात, भरत सिंह और उनके साथी फोन पर बातचीत के बाद विरोधी गुट के सदस्यों से मिलने गए, जिसके बाद झगड़ा हिंसक हो गया।
पुलिस ने बताया कि पीड़ित दो गाड़ियों में थे, तभी विरोधी गुट के सदस्यों ने उन पर हमला कर दिया। पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने पीड़ितों के वाहन को बार-बार एक टिपर ट्रक से टक्कर मारी, जिससे गाड़ी को नुकसान पहुंचा और उसके दरवाजे जाम हो गए, जिससे अंदर बैठे लोग बाहर नहीं निकल पाए।
पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने पीड़ितों के वाहन पर ज्वलनशील पदार्थ डाला और उसमें आग लगा दी। पुलिस ने बताया कि जो लोग गाड़ी की खिड़कियां तोड़कर भागने की कोशिश कर रहे थे, उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया।
पुलिस ने बताया कि इस घटना में भरत सिंह की मौके पर ही जलकर मौत हो गई, जबकि नागेंद्र सिंह लगभग 80 प्रतिशत झुलस गए थे और बाद में इलाज के लिए रायपुर ले जाते समय उनकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि वाहन पर हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हुए वीरेंद्र प्रताप सिंह की अंबिकापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
पुलिस ने हत्याओं के सिलसिले में विरोधी त्रिपाठी परिवार के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
दूसरा मामला (अपराध क्रमांक 65/2026) दोनों परिवारों के सदस्यों के बीच हुई उस झड़प से जुड़ा है, जिसके कारण कथित तौर पर घटनाओं का वह सिलसिला शुरू हुआ जो तीन हत्याओं तक पहुंचा। पीड़ितों का परिवार इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा था।
राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के पास गृह विभाग भी है। उन्होंने बताया कि इस मामले को राज्य सरकार ने सीबीआई को सौंप दिया है।
शर्मा ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया, ”सभी के बीच चर्चा के बाद निर्णय हुआ है। निर्णय एक सप्ताह पहले हो गया था तथा उसकी प्रक्रिया में थोड़ा समय लगा। मुख्यमंत्री जी ने अंतिम निर्णय लिया है। इस जघन्य हत्या के मामले में क्या क्या कारण थे, किन कारणों से हुआ है, दोनों प्रकरणों के बीच में क्या संबंध है। इन सभी बातों की जांच के लिए इसे सीबीआई की जांच के लिए दिया गया है। हमने सीबीआई को भेज दिया है। इसे स्वीकार कर इसकी जांच करना शेष है।”
उन्होंने कहा, ”इस घटना के दो चश्मदीद गवाहों की सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। एक जिनकी तबीयत ठीक है उनका बयान हो गया है। दूसरे की हालत खतरे से बाहर है। डाक्टर की सलाह से उनका भी बयान लिया जाएगा।”
शर्मा ने कहा, ”ऐसे कार्य करने वाले अपराधी की अदालत में जल्द से जल्द सुनवाई के बाद सजा होगी ही, उसमें मुझे संशय नहीं है। इस मामले में अच्छे वकील लगाकर जल्द से जल्द अपराधियों को कठोर दंड मिले उसकी कोशिश की जाएगी।” भाषा संजीव अमित
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