Danteshwari Mandir News | Photo Credit: IBC24
जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर (Danteshwari Mandir News) में लाखों रुपए की चोरी हुई है। बताया जा रहा है कि चोरों ने मंदिर से सोने-चांदी के आभूषणों को पार कर दिया है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। वहीं, सूचना मिलने से मौके पर पहुंची पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
Danteshwari Mandir News अब इस घटना का सीसीटीवी फुटेज अब सामने आ गया है। फुटेज में चोर पूरी तरह खुद को ढंके हुए माता दंतेश्वरी के गले से हार निकालता हुआ साफ नजर आ रहा है। सीसीटीवी के आधार पर बस्तर पुलिस ने अब चोर की तलाश तेज कर दी है। बस्तर एसपी ने बताया कि चोरी से जुड़े सभी अहम सबूत एकत्र कर लिए गए हैं। फॉरेंसिक टीम ने भी मौके से तकनीकी साक्ष्य जुटाकर जांच में सहयोग शुरू कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक एक चांदी का चैन, एक सोने का लॉकेट और माता के बगल में स्थित एक अन्य मूर्ति से भी सोने का चैन चोरी हुआ है। मंदिर में तैनात होमगार्ड की ड्यूटी को लेकर भी जांच की जा रही है। एसपी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी और तकनीकी इनपुट के आधार पर जल्द खुलासे का दावा कर रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े किए थे, तब यहाँ उनका ‘दांत’ गिरा था, इसी कारण इस जगह का नाम ‘दंतेवाड़ा’ और माता का नाम ‘दंतेश्वरी’ पड़ा।
ऐतिहासिक दृष्टि से इस मंदिर का गहरा संबंध बस्तर के काकतीय वंश से है।
अन्नम देव: वारंगल (तेलंगाना) से आए राजा अन्नम देव ने 14वीं शताब्दी (लगभग 1324 ईस्वी) में बस्तर में काकतीय वंश की नींव रखी थी।
लोक कथाओं के अनुसार, मां दंतेश्वरी स्वयं राजा अन्नम देव के साथ वारंगल से बस्तर आई थीं। माता ने शर्त रखी थी कि राजा आगे चलेगा और माता पीछे-पीछे, लेकिन जहाँ राजा पीछे मुड़कर देखेगा, माता वहीं रुक जाएगी। शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर राजा ने पीछे मुड़कर देख लिया और माता वहीं स्थापित हो गईं।
जगदलपुर का मंदिर बस्तर दशहरा का केंद्र बिंदु है। 75 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में माता की ‘डोली’ दंतेवाड़ा से जगदलपुर लाई जाती है। यह दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला त्योहार है, जो पूरी तरह माता दंतेश्वरी को समर्पित है।