IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026: IBC24 ने बस्तर की 8 बेटियों को दिया स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप, डिप्टी सीएम विजय शर्मा के हाथों हुए सम्मानित, खिले होनहारों के चेहरे

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IBC24 ने बस्तर की 8 बेटियों को दिया स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप, डिप्टी सीएम विजय शर्मा के हाथों हुए सम्मानित, IBC24 Swarna Sharda Scholarship to 8 daughters of Bastar

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  • Publish Date - August 15, 2026 / 03:19 PM IST,
    Updated On - August 15, 2026 / 03:39 PM IST

जगदलपुरः IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026 बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आज आजादी पर्व के पावन अवसर पर IBC24 की ओर से ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026′ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम विजय शर्मा बतौर मुख्यअतिथि शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बस्तर संभाग की उन 8 बेटियों को स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप प्रदान किया, जिन्होंने बोर्ड परीक्षा में अपने जिले की प्रावीण्य सूची में अपना स्थान बनाया है। कार्यक्रम में पहुंचने पर IBC24 के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश गोयल ने उनका स्वागत किया। इस दौरान चैनल के एडिटर इन चीफ रवि कांत मित्तल ने डिप्टी सीएम विजय शर्मा से संवाद किया।

ये होनहार बेटियां हुई सम्मानितः

क्रमांक जिला नाम
1 बीजापुर वनश्री लाटकर
2 बस्तर कल्याणी मिश्रा
3 कोंडागांव सालेहा पारेख
4 दंतेवाड़ा टिशा साहू
5 कांकेर महेश्वरी
6 कांकेर अपर्णा बिस्वास
7 नारायणपुर मुस्कान पटेल
8 सुकमा शेख जस्मिन

भय खत्म करने के लिए निकाली गई तिरंगा यात्रा

IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026 बस्तर में तिरंगा यात्रा को लेकर डिप्टी सीएम शर्मा कहा कि बस्तर में तिरंगा फहराने पर हत्याएं हुई है। अभी भी वहां के लोगों में यह डर बना हुआ है कि कही फिर हत्या जैसी वारदातें ना हो जाए। इसलिए लोगों में भय खत्म करने के लिए यह तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। उन्होंने एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब वे कांकेर जिले के एक गांव में गए थे तो वहां ग्रामीणों ने कहा कि नक्सली उन्हें तिरंगा फहराने नहीं दे रहे थे तो एक तरकीब निकली। पहले उन्होंने तिरंगा फहराया फिर उसे छाते से ढक दिया। उन्होंने कहा कि यह साहसिक कार्य करने वाले लोग वहां पर हैं, जिनके हृदय में यह बात थी।

हमारे यहां दिमागी नक्सली की समस्या नहीं- शर्मा

दिमागी नक्सलवाद के सवाल पर डिप्टी सीएम शर्मा ने ट्विन टावर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों ने प्लेन हाईजैक किया और ट्विन टावर में टकरा दिया। उसमें लगभग 2300 लोग मारे गए थे। पायलट, इंजीनियर्स, डॉक्टर्स थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की थी। उनके घर परिवार में पैसे रुपए की संसाधनों की कोई कमी नहीं थी। खुद भी मर गए और लोगों को भी मार डाला। भय उस वाद से है जो फितूर बनकर माथे पर चढ़ जाता है और फिर आदमी से कुछ भी करवाता है जो यहां हो रहा था बस्तर में। और जो जिसकी चिंता अभी भी बनी हुई है। बस्तर में पुनर्वासित माओवादियों का मानसिक, समाजिक और स्किल का पुर्नवास हो रहा है। हमारे यहां दिमागी नक्सली की समस्या नहीं आने वाली है।