रायपुरः MP CG Pension Dispute छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज महानदी भवन यानी मंत्रालय ने कैबिनेट की अहम बैठक हुई। इस बैठक में छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने सहित अन्य अहम फैसलों पर मुहर लगी है। बुधवार को हुई इस बैठक में पेंशन भुगतान विवाद में अतिरिक्त राशि की वापसी पर सहमति बनी है। इसमें से 2000 करोड़ मिल चुके हैं, जबकि बाकी राशि 6 किस्तों में मिलेगी।
दरअसल, पच्चीस साल पहले मप्र और छत्तीसगढ़ के बंटवारे के वक्त जितने भी पेंशनधारी छत्तीसगढ़ में रह गए और बाद में जो रिटायर हुए, उनकी पेंशन को लेकर एक मानक तैयार किया गया था। बंटवारे की शर्त थी कि इन लोगों कें पेंशन को लेकर जो भी वित्तीय भार छत्तीसगढ़ पर आएगा, उसमें हर एक रुपए का 26.63% पैसा छग को देना होगा। शेष 73.37% पैसे की भरपाई मप्र करेगा। पेंशन वितरण में भी यह लागू रहा। हाल ही में छग सरकार में खर्चों का दबाव बढ़ा तो वित्त की टीम ने पड़ताल शुरू की। पेंशन के आंकड़े देखे तो पता चला कि मप्र का शेयर तो मिल ही नहीं रहा। यानी पूरा भुगतान छत्तीसगढ़ के खाते ही हो रहा था। मप्र सरकार भी पैसा देने को राजी हो गई है। मशक्कत इस बात की हो रही थी कि यह पैसा एकमुश्त न देकर दो-तीन साल की किस्तों में दिया जाए।
MP CG Pension Dispute साय कैबिनेट की बैठक में ये फैसला हुआ है कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के प्रावधानों के अनुरूप छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के बीच पेंशन दायित्वों के प्रभाजन के संदर्भ में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पूर्व वर्षों में किए गए 10,536 करोड़ रूपए के आधिक्य पेंशन भुगतान की राशि की वापसी पर सहमति दी गई। बैंकों द्वारा पूर्व में हुए त्रुटिपूर्ण लेखांकन के कारण यह अतिरिक्त भुगतान हुआ था, जिसका पुनर्मिलान एवं सत्यापन संयुक्त दल द्वारा किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, मध्यप्रदेश शासन द्वारा 2,000 करोड़ रुपए की राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदान की जा चुकी है तथा शेष 8,536 करोड़ रुपए की राशि आगामी 6 वार्षिक किश्तों में दी जाएगी। मंत्रिपरिषद ने इस व्यवस्था को स्वीकार करते हुए वित्त विभाग को आवश्यक कार्यवाही के लिए अधिकृत किया है।