Ambedkar Hospital Raipur Achievements: 15 साल से पीठ पर 10 किलोग्राम से ज्यादा वजनी ट्यूमर लेकर जिंदगी जी रहा था युवक, चलने-फिरने और सोने में होती थी दिक्कत, अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टरों की दी नई जिंदगी

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Ambedkar Hospital Raipur Achievements: 15 साल से पीठ पर 10 किलोग्राम से ज्यादा वजनी ट्यूमर लेकर जिंदगी जी रहा था युवक, चलने-फिरने और सोने में होती थी दिक्कत, अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टरों की दी नई जिंदगी

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  • Publish Date - April 12, 2026 / 10:08 AM IST,
    Updated On - April 12, 2026 / 10:08 AM IST

Ambedkar Hospital Raipur Achievements: 15 साल से पीठ पर 10 किलोग्राम से ज्यादा वजनी ट्यूमर लेकर जिंदगी जी रहा था युवक / Image: IBC24 Customized

HIGHLIGHTS
  • रायपुर के अम्बेडकर अस्पताल में ऐतिहासिक सर्जरी,
  • डॉ. संतोष सोनकर और डॉ. मंजू सिंह की टीम का कमाल
  • 15 साल की पीड़ा से मिली मुक्ति

रायपुर: Ambedkar Hospital Raipur Achievements डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल, संवेदनशील, जोखिमपूर्ण और चुनौतीपूर्ण शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक संपन्न कर चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक और लेप्रोस्कोपिक एवं जनरल सर्जन डॉ. संतोष सोनकर एवं सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह के नेतृत्व में सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने एक मरीज के शरीर से 10.30 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर (गांठ/गठान) को सफलतापूर्वक निकालकर न केवल एक कठिन चिकित्सा चुनौती का समाधान किया, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति को पुनः सामान्य जीवन जीने की आशा, सम्मान और आत्मविश्वास भी लौटाया, जो पिछले लगभग 15 वर्षों से शारीरिक पीड़ा, सामाजिक असुविधा और मानसिक संघर्ष के साथ जीवन जी रहा था। यह केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के शासकीय चिकित्सा तंत्र, चिकित्सकीय विशेषज्ञता, मानवीय संवेदना और सेवा-समर्पण का जीवंत उदाहरण है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि जब चिकित्सा विज्ञान, अनुभव, संवेदनशीलता और समर्पण एक साथ आते हैं, तब असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों में भी नई आशा का जन्म होता है।

दुर्लभ एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि

Ambedkar Hospital Raipur Achievements उपलब्ध मेडिकल लिटरेचर एवं वर्तमान अभिलेखों के अनुसार, भारत में अब तक लगभग 8 किलोग्राम तक के ट्यूमर के सफल निष्कासन का उल्लेख मिलता है, जबकि विश्व स्तर पर लगभग 22 किलोग्राम तक के ट्यूमर के ऑपरेशन का अभिलेख उपलब्ध है। ऐसे परिप्रेक्ष्य में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर द्वारा 10.30 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर का सफल निष्कासन भारतवर्ष के संदर्भ में एक अत्यंत उल्लेखनीय, असाधारण और गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह सफलता न केवल अस्पताल के सर्जरी विभाग की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व, सम्मान और प्रेरणा का विषय है।

दर्द और पीड़ा के वे 15 वर्ष

इस केस को देखने वाले प्रमुख चिकित्सक डॉ. संतोष सोनकर के अनुसार, मरीज की पीठ पर यह विशाल ट्यूमर पिछले लगभग 15 वर्षों से मौजूद था, जो धीरे-धीरे निरंतर बढ़ता गया। वर्षों तक यह बढ़ती हुई गांठ मरीज के जीवन पर भारी बोझ बनती चली गई। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी हो गई कि मरीज को चलने-फिरने, बैठने, उठने, सोने और दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों तक में अत्यधिक कठिनाई होने लगी। केवल शारीरिक कष्ट ही नहीं, बल्कि इतने बड़े ट्यूमर के कारण मरीज को मानसिक पीड़ा, सामाजिक असहजता और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा था। एक व्यक्ति का जीवन, जो सामान्य होना चाहिए था, वह वर्षों से दर्द और संघर्ष में बंधा हुआ था।

टीमवर्क, सटीक योजना और वरिष्ठ चिकित्सकों का नेतृत्व

जब मरीज डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के सर्जरी विभाग पहुँचा, तब विभागीय टीम ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल अत्यंत संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ मरीज का क्लिनिकल मूल्यांकन, रेडियोलॉजिकल जांच, आवश्यक लैब परीक्षण, प्री-ऑपरेटिव असेसमेंट और बहु-विभागीय चिकित्सा तैयारी प्रारंभ की। इस प्रकार की जटिल शल्य चिकित्सा केवल तकनीकी कौशल का विषय नहीं होती, बल्कि इसके लिए सटीक योजना, उच्च स्तरीय समन्वय, अनुभवी निर्णय क्षमता और मरीज के प्रति गहरी मानवीय प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। सर्जरी विभाग ने इन सभी आयामों पर उत्कृष्ट कार्य करते हुए इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को एक मिशन की तरह लिया।

इस जटिल एवं ऐतिहासिक शल्य चिकित्सा को विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह एवं मेडिकल सुपरिटेंडेंट एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. संतोष सोनकर के कुशल नेतृत्व, मार्गदर्शन, सतत निगरानी और चिकित्सकीय दूरदृष्टि में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। दोनों वरिष्ठ चिकित्सकों के निर्देशन में पूरी टीम ने अत्यंत संगठित, अनुशासित और समर्पित भाव से कार्य करते हुए इस कठिन ऑपरेशन को सफलता के साथ पूरा किया। इस महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा में सीनियर सर्जन डॉ. राजेंद्र रात्रे, सीनियर सर्जन डॉ. मयंक भूषण मिश्रा एवं सीनियर रेजिडेंट डॉ. प्रेक्षा जैन ने प्रमुख भूमिका निभाई। इन चिकित्सकों ने अत्यंत सूक्ष्मता, तकनीकी दक्षता, धैर्य, साहस और शल्य कौशल का परिचय देते हुए विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक शरीर से निकाला।

एनेस्थीसिया टीम की थी अहम भूमिका

ऐसे ऑपरेशन में हर क्षण निर्णय महत्वपूर्ण होता है, हर कदम जिम्मेदारी से भरा होता है, और हर छोटी तकनीकी बारीकी मरीज के जीवन से सीधे जुड़ी होती है। इस टीम ने अपनी विशेषज्ञता और समर्पण से यह सिद्ध किया कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी चिकित्सा सेवा का सर्वोच्च स्तर संभव है। इस ऑपरेशन में निश्चेतना (एनेस्थीसिया) विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण, निर्णायक और प्रशंसनीय रही। इतने बड़े और जटिल ट्यूमर के ऑपरेशन में मरीज की संपूर्ण शारीरिक स्थिरता बनाए रखना, ऑपरेशन के दौरान प्रत्येक चरण की सतत निगरानी करना तथा पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी को सुरक्षित दिशा देना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। इस महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन डॉ. जया लालवानी एवं डॉ. प्रतिभा जैन शाह ने अपनी विशेषज्ञ सेवाओं के माध्यम से अत्यंत उत्कृष्ट ढंग से किया। उनकी सतर्कता, अनुभव और निश्चेतना प्रबंधन ने इस ऑपरेशन की सफलता में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चिकित्सा सेवा के साथ मानवीय संवेदना की जीत

विशाल आकार, दीर्घकालिक वृद्धि और शरीर के महत्वपूर्ण हिस्से पर स्थित होने के कारण यह ऑपरेशन अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। इस प्रकार की शल्य प्रक्रिया में अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना, महत्वपूर्ण ऊतकों की सुरक्षा, ऑपरेटिव समय की जटिलता, संक्रमण नियंत्रण, एनेस्थीसिया संतुलन तथा पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल जैसे अनेक संवेदनशील पहलुओं पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। इसके बावजूद डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर की टीम ने अपनी उत्कृष्ट योजना, सामूहिक समन्वय और चिकित्सा विशेषज्ञता के बल पर इस जटिल चुनौती को सफलता में परिवर्तित कर दिया।

सबसे भावनात्मक और संतोषप्रद पक्ष यह रहा कि ऑपरेशन के पश्चात मरीज की स्थिति लगातार संतोषजनक रही। चिकित्सकों की गहन निगरानी, समुचित दवा, देखभाल और पोस्ट-ऑपरेटिव प्रबंधन के बाद मरीज की रिकवरी बेहतर रही और अंततः उसे स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया। एक ऐसा मरीज, जो वर्षों से एक विशाल ट्यूमर के बोझ तले जीवन जी रहा था, आज वह उस पीड़ा से मुक्त होकर एक नए जीवन की ओर अग्रसर है। यह दृश्य केवल चिकित्सा सफलता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की विजय है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर सदैव गंभीर और जटिल मरीजों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। 10.30 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन हमारे संस्थान की विशेषज्ञता, टीमवर्क और समर्पित चिकित्सा सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह सफलता केवल एक चिकित्सकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संदेश है कि छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में भी उच्चस्तरीय, जटिल और चुनौतीपूर्ण शल्य चिकित्सा पूरी क्षमता और दक्षता के साथ की जा सकती है। इस पूरे प्रकरण में हमारी सर्जरी टीम, एनेस्थीसिया टीम और सहयोगी स्टाफ ने असाधारण समर्पण दिखाया। सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि मरीज अब स्वस्थ है और अपने घर लौट चुका है। जब किसी मरीज के चेहरे पर राहत, आत्मविश्वास और नई जिंदगी की चमक लौटती है, तभी चिकित्सा सेवा का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है। यह उपलब्धि हमारे संस्थान के लिए गर्व का विषय है और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा है।_*

डॉ. संतोष सोनकर, चिकित्सा अधीक्षक अम्बेडकर अस्पताल

डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के सर्जरी विभाग की यह सफलता केवल एक चिकित्सा उपलब्धि भर नहीं है। यह उन तमाम मरीजों के लिए आशा और उम्मीद का संदेश है, जो जटिल बीमारियों और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के कारण निराश हो जाते हैं। यह उपलब्धि बताती है कि सही समय पर सही चिकित्सा, विशेषज्ञ टीम और संवेदनशील उपचार के माध्यम से जीवन को फिर से सामान्य बनाया जा सकता है। यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ की चिकित्सा व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि बताती है कि हमारे सरकारी अस्पताल सक्षम हैं, हमारे डॉक्टर समर्पित हैं, हमारी चिकित्सा व्यवस्था निरंतर प्रगति कर रही है और छत्तीसगढ़ अब केवल इलाज ही नहीं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में नई मिसालें गढ़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रदेश के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि सेवा, संवेदना, विज्ञान और समर्पण जब एक साथ आते हैं, तब चिकित्सा केवल उपचार नहीं रहती, वह किसी जीवन को पुनर्जन्म देने का माध्यम बन जाती है और इस केस में यकीनन ऐसा ही हुआ है।

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अम्बेडकर अस्पताल रायपुर में कितने किलो का ट्यूमर निकाला गया?

अम्बेडकर अस्पताल रायपुर में डॉक्टरों ने एक मरीज के शरीर से 10.30 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला।

इस सर्जरी का नेतृत्व किसने किया?

इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व डॉ. संतोष सोनकर और डॉ. मंजू सिंह ने किया, जिनके मार्गदर्शन में पूरी टीम ने ऑपरेशन सफल बनाया।

मरीज कितने समय से इस बीमारी से परेशान था?

मरीज पिछले करीब 15 वर्षों से इस ट्यूमर की समस्या से जूझ रहा था, जिससे उसे शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की परेशानी हो रही थी।

यह सर्जरी इतनी खास क्यों मानी जा रही है?

भारत में आमतौर पर 8 किलो तक के ट्यूमर ऑपरेशन के मामले सामने आए हैं, ऐसे में 10.30 किलो ट्यूमर निकालना एक बड़ी और दुर्लभ उपलब्धि मानी जा रही है।

ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति कैसी है?

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर और बेहतर रही, सफल इलाज के बाद उसे स्वस्थ हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।