CG Vidhansabha Chunav 2023: 20 पर कौन ’21’? किसके हाथ लगेगी ‘सत्ता की चाबी’? पहले चरण की 20 सीटों पर कौन लेगा लीड?

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CG Vidhansabha Chunav 2023: 20 पर कौन '21'? किसके हाथ लगेगी 'सत्ता की चाबी'? पहले चरण की 20 सीटों पर कौन लेगा लीड?

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  • Publish Date - October 15, 2023 / 09:50 PM IST,
    Updated On - October 15, 2023 / 09:50 PM IST

रायपुर। CG Vidhansabha Chunav 2023 विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने आज अपने 30 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। इनमें पहले चरण की 20 में से 19 सीटें भी शामिल हैं। भाजपा भी पहले चरण की 19 सहित कुल 85 सीटों पर अपने प्रत्यशियों का पिक्चर क्लियर कर चुकी है। पहले चरण के महासंग्राम पर दोनों पार्टी की नजर है क्योंकि इसमें वो 20 में से 12 वो सीटें हैं जो बस्तर से आती हैं। जिसे छत्तीसगढ़ की सत्ता की चाबी कही जाती है। बीजेपी कांग्रेस के आलावा थर्ड फ्रंट भी जोर अजमाइश कर रही है।

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CG Vidhansabha Chunav 2023 छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी 30 नामों वाली पहली सूची जारी कर दी है। प्रदेश में दो चरणों में चुनाव होने है, पहले चरण में 20 सीटों पर मतदान होने हैं जिसमें कांग्रेस ने 19 नामों का ऐलान कर दिया है। जगदलपुर सीट की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। दिलचस्प ये है कि कांग्रेस ने 30 सीटो में से 8 विधायकों का टिकट काटा है जिसमें पहले चरण के 7 विधायक शामिल हैं। इधर, बीजेपी ने भी इन 20 सीटों में से 19 पर पहले ही नामों का ऐलान कर दिया है। केवल पंडरिया सीट पर ऐलान अभी बाकी है। 2018 के चुनाव में पहले चरण की 20 सीटों पर कांग्रेस ने 19 सीटें जीतीं थी और केवल एक राजनांदगांव सीट बीजेपी के पास है। जहां से रमन सिंह विधायक हैं। तो इस बार कांग्रेस के पास जहां अपनी सीटें बचाने की चुनौती है, तो वहीं बीजेपी पहले चरण में बढ़त लेने की कोशिश करेगी। टिकटों के ऐलान के बाद कांग्रेस जीत के दावे कर रही है तो भाजपा तंज कस रही है।

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कांग्रेस ने जिन 7 सीटों पर विधायकों का टिकट काटा है। इनमें से 3 सीटें ऐसी हैं जिन पर 2018 में पार्टी ने 30 हजार से भी ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। वहीं पहले चरण की 20 में से 12 सीटें बस्तर संभाग की हैं। प्रदेश में बस्तर को सत्ता की चाबी कहा जाता है। जो बस्तर पर कब्जा करता है वो सिंहासन पर बैठता है। इस लिए पहला चरण सभी पार्टियों के लिए अहम है। इस बार तीसरा मोर्चा यानी AAP, बसपा, गोंगपा, सर्व आदिवासी समाज भी मैदान में दमखम दिखा रहे हैं। ऐसे में इस बार के चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आसान नहीं रहने वाले।

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