हैदराबाद, 16 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना में 2024-25 के दौरान कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए जाति सर्वेक्षण का विश्लेषण करने वाले एक विशेषज्ञ समूह ने पाया है कि राज्य की कुल 242 जातियों में से 135 जातियां औसत समग्र पिछड़ापन सूचकांक से अधिक पिछड़ी हैं।
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाले स्वतंत्र विशेषज्ञ कार्य समूह (आईईडब्ल्यूजी) ने यह भी कहा कि अनुसूचित जातियां (एससी) और अनुसूचित जनजातियां (एसटी) सामान्य वर्ग की तुलना में ‘‘तीन गुना अधिक पिछड़ी’’ हैं।
हालांकि, यह सर्वेक्षण 2024-25 में कराया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने ‘तेलंगाना सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति सर्वेक्षण-2024’ को बुधवार देर रात सार्वजनिक किया।
मार्च 2025 में राज्य सरकार ने इस सर्वेक्षण का व्यापक विश्लेषण करने के लिए नौ सदस्यीय आईईडब्ल्यूजी का गठन किया था। इस समूह को सर्वे के निष्कर्षों का सत्यापन, विश्लेषण, व्याख्या और प्रस्तुतीकरण करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
समूह ने अपनी प्रमुख टिप्पणियों में कहा कि पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सामान्य वर्ग की तुलना में 2.7 गुना अधिक पिछड़ा है।
समूह ने कहा कि पूरे राज्य का औसत समग्र पिछड़ापन सूचकांक (सीबीआई) 81 है। उसने कहा, ‘‘ध्यान रहे, सीबीआई स्कोर जितना अधिक होगा, जाति उतनी ही अधिक पिछड़ी मानी जाएगी। 242 में से 135 जातियों का सीबीआई स्कोर 81 से अधिक है और ये 135 जातियां राज्य की कुल आबादी का 67 प्रतिशत हिस्सा हैं।’’
इन 135 जातियों में 69 पिछड़ा वर्ग, 41 अनुसूचित जाति और 25 अनुसूचित जनजाति की जातियां शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि अपेक्षित रूप से ‘सामान्य वर्ग’ की 18 जातियां, जो कुल आबादी का 12 प्रतिशत हिस्सा हैं, राज्य के औसत सीबीआई से काफी नीचे हैं।
रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि ‘‘हर पिछड़ी जाति समान रूप से पिछड़ी नहीं होती।’’
यदि 135 जातियां औसत से अधिक पिछड़ी हैं, तो इसका अर्थ है कि 107 जातियां ऐसी हैं, जो राज्य के औसत से कम पिछड़ी मानी गई हैं।
इन 107 अपेक्षाकृत कम पिछड़ी जातियों में सामान्य वर्ग की सभी 18 जातियां, पिछड़ा वर्ग की 64 जातियां, अनुसूचित जाति की 18 और अनुसूचित जनजाति की सात जातियां शामिल हैं।
ये 107 जातियां राज्य की कुल आबादी का 29 प्रतिशत हिस्सा हैं।
भाषा गोला शोभना
शोभना