बुद्धिजीवियों, वकीलों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह ने एसआईआर पर रोक लगाने की मांग की

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बुद्धिजीवियों, वकीलों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह ने एसआईआर पर रोक लगाने की मांग की

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  • Publish Date - April 19, 2026 / 03:16 PM IST,
    Updated On - April 19, 2026 / 03:16 PM IST

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) बुद्धिजीवियों, वकीलों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर तुरंत रोक लगाने की मांग करते हुए कहा है कि यह “नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ” है और पुरानी मतदाता सूचियों को बरकरार रखते हुए उसी आधार पर चुनाव कराए जाने चाहिए।

‘जनहस्तक्षेप’ नामक मानवाधिकार संगठन ने शनिवार को ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ में आयोजित एक संगोष्ठी में यह मांग की। आयोजकों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संगोष्ठी में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर बद्री रैना, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की अध्यक्ष संगीता बरुआ पिशारोटी समेत कई लोग शामिल हुए।

संगोष्ठी में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया।

प्रस्ताव में कहा गया है, “पश्चिम बंगाल समेत देशभर में जारी एसआईआर प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। वैकल्पिक रूप से, जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी अपीलों का शीघ्र निपटारा किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें मतदान की अनुमति मिल सके, या फिर 2025 की अद्यतन मतदाता सूचियों का उपयोग करके सभी का मतदान अधिकार सुनिश्चित किया जाए।”

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि ऐसा न होने पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव निरर्थक हो जाएंगे।

प्रस्ताव में कहा गया है, “एसआईआर प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से पुनर्परिभाषित किया जाना चाहिए और निर्वाचन आयोग की भूमिका मतदाता सूची में नाम जोड़ने की है; वह नागरिकता से संबंधित दस्तावेजों की मांग या सत्यापन नहीं कर सकता। नागरिकता का निर्धारण गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है।”

संगोष्ठी के संयोजक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के विकास बाजपेयी और सह-संयोजक पत्रकार अनिल दुबे थे।

भाषा जोहेब गोला

गोला