बेंगलुरु, 25 अगस्त (भाषा) अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई और कथित घोटाले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर मंगलवार को यहां मुख्यमंत्री के आवास और फ्रीडम पार्क के पास प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारी मौर्या सर्किल के पास भी एकत्रित हुए और सड़क पर कथित तौर पर बैठ गए, जिससे यातायात बाधित हुआ।
पुलिस ने बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया और एबीवीपी के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। सामने आए दृश्यों में प्रदर्शनकारियों को बसों में ले जाते हुए देखा गया।
प्रदर्शनकारियों ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं और पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में अनियमितताओं का आरोप लगाया।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘यह बेहद अनुचित है। अगर इस तरह भ्रष्टाचार होगा तो हमें निष्पक्ष तरीके से नौकरी कैसे मिलेगी? मेहनत से पढ़ाई करने वाले लोगों को सरकारी नौकरी नहीं मिल रही, जबकि पैसे देने वालों को जगह मिल रही है।’’
अभ्यर्थियों के लिए न्याय की मांग करते हुए एक छात्र ने कहा, ‘‘व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए। केपीएससी को बचाना होगा। यह हमारे राज्य और देश का भविष्य है।’’
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के गृह कार्यालय ‘कृष्णा’ के पास भी प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उस पर ‘‘छात्र विरोधी’’ होने का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारी उस स्थान के पास भी एकत्रित हुए, जहां मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार मौजूद थे और उन्होंने सड़क जाम कर दी।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उन्हें फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा रही। इसके बाद वे मजेस्टिक और फ्रीडम पार्क के आसपास के इलाकों में चले गए। पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
छात्रों ने मांग की कि कथित केपीएससी घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों को संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए और मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।
कर्नाटक मंत्रिमंडल ने हाल में राज्यपाल थावरचंद गहलोत को केपीएससी के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को निलंबित करने की सिफारिश करने का फैसला किया था।
यह फैसला साहूकार का पहले किये गए निलंबन को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा रद्द करके उन्हें बहाल करने के कुछ दिनों बाद आया। हालांकि, अदालत ने कहा था कि निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन होने पर उनके खिलाफ नए सिरे से कार्रवाई की संभावना खुली है।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 317(2) के तहत राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना साहूकार को स्वतंत्र रूप से निलंबित नहीं कर सकते।
साहूकार को 13 जुलाई को राज्यपाल ने उन आरोपों के बाद निलंबित किया था, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने अपनी दो बेटियों की औद्योगिक विस्तार अधिकारियों के पद पर कथित अवैध चयन में मदद की थी।
पशु चिकित्सकों की भर्ती में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
भाषा अमित दिलीप
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