जयपुर, दो जुलाई (भाषा) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि मानव नीत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में निर्णायक शक्ति साबित होगी।
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी को मानवीय जवाबदेही की जगह लिए बिना शासन-व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए।
सिंह ने जयपुर में ई-गवर्नेंस पर आयोजित 29वें राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब विकल्प का विषय नहीं रही, बल्कि सुशासन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘असल चुनौती कृत्रिम बुद्धिमत्ता नहीं है, बल्कि यह है कि क्या सरकारों के पास इसे जिम्मेदारीपूर्वक लागू करने की दूरदृष्टि और परिपक्वता है, जिसमें हर तकनीकी हस्तक्षेप के केंद्र में नागरिक हों।’’
प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का समापन ‘जयपुर घोषणा-पत्र : ई-गवर्नेंस 2026’ को अपनाने के साथ हुआ।
सम्मेलन का विषय ‘‘विकसित भारत 2047 : एआई-सक्षम, डेटा-आधारित एवं सुरक्षित डिजिटल शासन’’ था।
सिंह ने कहा, ‘‘भारत का डिजिटल परिवर्तन मानवीय निर्णयों का स्थान मशीनों के लेने के लिए नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से सार्वजनिक संस्थानों को सशक्त बनाकर पारदर्शिता, जवाबदेही, दक्षता और सेवा वितरण में सुधार लाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।’
उन्होंने कहा कि भविष्य का शासन कृत्रिम बुद्धिमत्ता की गति और विश्लेषण क्षमता को मानवीय विवेक, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक जवाबदेही के साथ जोड़कर आगे बढ़ेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘वास्तविक सवाल केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नहीं है, बल्कि यह है कि हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कितनी बुद्धिमानी से करते हैं।’’
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का उद्देश्य मानवीय क्षमता को बढ़ाना, संस्थागत विश्वसनीयता को मजबूत करना और नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाना होना चाहिए, जबकि इसकी नींव नैतिकता, पारदर्शिता और जनविश्वास पर आधारित रहे।
सिंह ने कहा कि इस सम्मेलन ने यह प्रदर्शित किया है कि भारत की डिजिटल शासन यात्रा केवल सेवाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और सुरक्षित डिजिटल पारिस्थितिकी पर आधारित नए चरण में प्रवेश कर चुकी है।
उन्होंने ‘अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में शुरू किए गए तकनीकी हस्तक्षेपों का उद्देश्य शासन को अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना रहा है।
कार्यक्रम के दौरान सिंह ने केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों, ग्राम पंचायतों तथा शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों की 17 परियोजनाओं व पहलों को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया।
इन पुरस्कारों में सात श्रेणियों के अंतर्गत 10 स्वर्ण, छह रजत और एक निर्णायक मंडल पुरस्कार शामिल थे।
मंत्री ने डिजिटल शासन के क्षेत्र में राजस्थान की प्रगति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राजकाज एकीकृत प्रशासनिक मंच ने कागजरहित और प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासन के माध्यम से कार्यकुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया है।
भाषा बाकोलिया पारुल धीरज
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