बेंगलुरु, 28 जून (भाषा) कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने रविवार को वक्फ भूमि का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ से किसानों की आजीविका खतरे में पड़ गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार भूमि अभिलेखों में वक्फ संबंधी प्रविष्टियां दर्ज कराकर किसानों के भूमि अधिकारों को खतरे में डाल रही है और इस प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की।
अशोक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि राज्य के 1.8 लाख से अधिक किसानों के ‘रिकॉर्ड ऑफ राइट्स, टेनेंसी एंड क्रॉप्स’ (आरटीसी) में पहले ही वक्फ संबंधी प्रविष्टियां दर्ज की जा चुकी हैं और इस प्रक्रिया का विस्तार कर 31 जिलों में तीन लाख आरटीसी तक इसे ले जाया जा रहा है।
उन्होंने इस पूरे मामले पर श्वेतपत्र जारी करने की भी मांग की।
अशोक ने कहा, ‘‘किसानों की जमीन को वक्फ विवाद में घसीटकर कांग्रेस सरकार आखिर किसके हितों की रक्षा कर रही है? कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की सरकार की तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति अब उस स्तर पर पहुंच गई है, जहां यह राज्य के किसानों के अस्तित्व के लिए ही खतरा बन गई है।’’
उन्होंने कहा कि यदि मीडिया में आई खबरें गलत हैं, तो सरकार को तत्काल सही तथ्य जनता के सामने रखने चाहिए। लेकिन यदि ऐसी प्रविष्टियां वास्तव में की गई हैं, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किसानों को अपनी जमीन बेचने, बैंक से ऋण लेने और स्वामित्व अधिकारों का उपयोग करने में अनिश्चितता का सामना क्यों करना पड़ रहा है।
भाजपा नेता ने दावा किया कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 1.8 लाख से अधिक आरटीसी में वक्फ संबंधी प्रविष्टियां दर्ज की जा चुकी हैं और यह प्रक्रिया आगे बढ़कर 31 जिलों के तीन लाख आरटीसी तक पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि इनमें उत्तर कन्नड़ जिले के 73,000, दक्षिण कन्नड़ के 48,000, शिवमोगा के 38,000, बेंगलुरु दक्षिण के 18,000 तथा कलबुर्गी और बागलकोट के 17-17 हजार आरटीसी शामिल हैं।
उन्होंने सरकार से इस प्रक्रिया को तत्काल रोकने, किसानों के आरटीसी में दर्ज सभी विवादित प्रविष्टियों की समीक्षा करने और पूरे मामले पर जनता के समक्ष श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।
अशोक ने कहा, ‘‘किसानों की जमीन और उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। हम किसी भी परिस्थिति में वक्फ के नाम पर किसानों की जमीन हड़पने नहीं देंगे।’’
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