अरावली समिति के दौरे, लोगों से बातचीत अपर्याप्त: आदिवासी नेताओं, पर्यावरण संरक्षणवादियों ने कहा

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अरावली समिति के दौरे, लोगों से बातचीत अपर्याप्त: आदिवासी नेताओं, पर्यावरण संरक्षणवादियों ने कहा

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 09:22 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 09:22 PM IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) विभिन्न राजनीतिक, आदिवासी और किसान नेताओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षणवादियों ने उच्चतम न्यायालय की ओर से बनाई गई अरावली समिति को पत्र लिखकर कहा है कि अरावली रेंज में उनका वैज्ञानिक अध्ययन, लोगों से बातचीत की प्रक्रिया और क्षेत्र के दौरे अपर्याप्त रहे हैं।

उन्होंने यह भी मांग की है कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट सौंपने की 31 अगस्त की समयसीमा बढ़ाई जाए, ताकि समिति को प्रक्रियाओं को ठीक से पूरा करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

समिति को अरावली पर्वत शृंखला की परिभाषा और सीमा-निर्धारण पर केंद्र की रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा करने का काम सौंपा गया है।

मुद्दे पर समिति को पत्र लिखने वाले दक्षिण राजस्थान के बांसवाड़ा से भारत आदिवासी पार्टी के लोकसभा सदस्य राजकुमार रोत ने कहा, ‘‘जन-सुनवाई सिर्फ़ गुरुग्राम, अलवर, अजमेर और उदयपुर जैसे चार शहरों में ही हुई। इनमें उन आदिवासी समुदायों की मौजूदगी न के बराबर या बिल्कुल नहीं थी, जो सदियों से अरावली पर्वतमाला की गोद में रहते आए हैं और अपनी ज़िंदगी के लिए पूरी तरह से वहाँ की पहाड़ियों, जंगलों और झरनों पर निर्भर हैं।’’

पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों के समूह ‘अरावली विरासत जन अभियान’ के अनुसार, समिति ने 6 अगस्त से 10 अगस्त के बीच क्षेत्र के दौरे के तहत दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान के नौ ज़िलों का दौरा किया।

इन दौरों के दौरान जन-सुनवाइयां आयोजित की गईं।

सीकर से माकपा के लोकसभा सदस्य अमरा राम ने समिति को पत्र लिखकर कहा कि यह निराशाजनक है कि समिति ने सीकर और कोटपूतली ज़िलों (जो अरावली क्षेत्र के सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में से हैं) में खनन और पत्थर तोड़ने के काम से प्रभावित किसी भी गाँव का दौरा नहीं किया, ताकि यह समझा जा सके कि बड़े और छोटे लाइसेंस धारक नियमों का पालन नहीं करते हैं।

पारिस्थितिकी बहाली के जानकार प्रदीप किशन ने मांग की कि अरावली का वैज्ञानिक अध्ययन ‘‘जाने-माने स्वतंत्र संस्थानों’’ और ‘‘अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों’’ द्वारा किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘यह अध्ययन अरावली पर्वतमाला की क्षमता की स्पष्ट तस्वीर पेश करेगा।’’

ऑल इंडिया किसान सभा के उपाध्यक्ष इंदरजीत सिंह ने कहा कि अरावली में खनन और खनन से निकले कचरे की वजह से चरागाह नष्ट हो गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी, अरावली समिति ने प्रभावित इलाकों में से किसी का भी दौरा नहीं किया, चाहे वे गुजरात, राजस्थान या हरियाणा, कहीं भी हों।’’

भाषा नेत्रपाल माधव

माधव