अयोध्या, 25 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के खिलाफ मंगलवार को संतों के एक समूह ने प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि पुलिस ने आश्रम में उनकी बैठक को जबरन रोक दिया।
कंप्यूटर बाबा, महंत जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण, महामंडलेश्वर परमानंद गिरि, महंत दिलीप दास समेत कई प्रमुख संतों ने यह बैठक बुलाई थी। वे राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
संतों के समूह ने आरोप लगाया कि करसेवकपुरम के पास ओम आश्रम में बैठक के दौरान पुलिस वहां पहुंची और उन्हें वहां से चले जाने को कहा। इसके बाद परिसर में ताला लगा दिया गया।
अयोध्या के क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने हालांकि इस आरोप से इनकार किया।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पुलिस ने उन्हें बैठक स्थल से जबरन बाहर निकाला, यह आरोप पूरी तरह गलत है।’’
क्षेत्राधिकारी ने कहा, ‘‘दरअसल, वे एक होटल के कमरे में बैठक कर रहे थे। होटल मालिक ने उनसे कमरा खाली करने को कहा क्योंकि उन्होंने कमरा ठहरने के लिए बुक किया था, बैठक करने के लिए नहीं।’’
तिवारी ने कहा कि यदि संत पुलिस द्वारा उनके साथ ज्यादती किए जाने का आरोप लगा रहे हैं तो उन्हें इसके सबूत पेश करने चाहिए।
प्रकाशानंद गिरि उर्फ कंप्यूटर बाबा ने कहा कि संत समाज निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘जरूरत पड़ी तो एक लाख संतों के साथ अयोध्या पहुंचकर आंदोलन किया जाएगा।’’
अयोध्या के महंत जन्मेजय शरण ने आरोप लगाया कि कथित गड़बड़ी में शामिल बड़े लोगों को बचाया जा रहा है।
शरण ने कहा, ‘‘राम मंदिर के चढ़ावे की लूट में छोटे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। जिला प्रशासन आरोपियों का पक्ष ले रहा है। वह आरोपियों को पकड़ना नहीं चाहता। इसी वजह से बैठक नहीं होने दी जा रही है।’’
महामंडलेश्वर परमानंद गिरि ने कहा कि कथित चोरी को रोक पाने में असमर्थ रहने के लिए संत समाज क्षमाप्रार्थी है और उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा, ‘‘संत इस लूट को नहीं रोक सके और इसके लिए हम हाथ जोड़कर रामलला से माफी मांगते हैं। आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाया जाना चाहिए।’’
उन्होंने यह भी कहा कि जांच में उन लोगों की पहचान की जानी चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर चढ़ावे की चोरी में बड़ी भूमिका निभाई।
मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आने के बाद चंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था और किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था। चढ़ावे के संग्रह और गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
भाषा
सं, सलीम रवि कांत