असम: बाढ़ के 20 दिन बाद भी पानी में डूबा हुआ है शिवसागर निवासी महिला का मकान

असम: बाढ़ के 20 दिन बाद भी पानी में डूबा हुआ है शिवसागर निवासी महिला का मकान

असम: बाढ़ के 20 दिन बाद भी पानी में डूबा हुआ है शिवसागर निवासी महिला का मकान
Modified Date: August 9, 2026 / 05:58 pm IST
Published Date: August 9, 2026 5:58 pm IST

(सुष्मिता गोस्वामी)

शिवसागर (असम), नौ अगस्त (भाषा) असम के शिवसागर कस्बे की निवासी नसीमन जमां भीषण बाढ़ के 20 दिन बाद रविवार को जब अपने घर वापस लौटीं तो वह खराब हो चुकी शादी की एलबम, दिवंगत मां की ओर से दिए गए डिनर सेट के बिखरे हुए टुकड़े, बेटियों की उलटी पड़ी हुईं पढ़ाई में इस्तेमाल होने वाली मेजें और अन्य सामान देखकर भावुक हो गईं।

जमां 20 दिन पहले अपनी दो बेटियों के साथ घर छोड़कर सुरक्षित जगह चली गई थीं।

घर के अंदर अब भी टखनों तक पानी भरा हुआ है। वह इस बात को लेकर चिंतित है कि वे वहां दोबारा कब रहने के लिए लौट पाएंगे; लेकिन उससे भी बड़ी चिंता यह है कि जब फिर से तेज बारिश होगी तो उन्हें कौन भरोसा दिलाएगा कि ऐसी तबाही दोबारा नहीं होगी।

जमां ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘हमारा घर मेरे पति के परिवार की पुश्तैनी जमीन पर बना है। हमारे घर के बगल में मेरे देवर का घर है और उसके आगे उनके चचेरे भाई का घर है। हमारे सभी घरों में पानी भर गया है। कुछ लोगों की स्थिति हमसे भी ज्यादा खराब है।”

जमां 21 जुलाई को शाम करीब 6 बजे जब अपनी दो नाबालिग बेटियों के साथ घर से निकलीं, तब उनके दो मंजिला मकान में चार फुट पानी भर चुका था। उन्होंने दिन में चार मजदूरों की मदद से घर का कुछ सामान निर्माणाधीन ऊपरी मंजिल पर रखवा दिया था।

जमां ने उस डरावने समय को याद करते हुए कहा, ‘मेरे पति, जो सरकारी कर्मचारी हैं, सरकारी काम से गुवाहाटी गए हुए थे। दोपहर के आसपास घर में पानी आना शुरू हुआ और छह घंटे के अंदर पानी लगभग मेरे सीने तक पहुंच गया था। अंधेरा होने लगा था, बिजली काट दी गई थी और हम किसी तरह बाहर निकल पाए।’

तब से वे शहर के दूसरे हिस्से में स्थित अपनी ननद के घर में रह रही हैं। उनके अलावा, उनके देवर का परिवार भी उसी घर में रह रहा है।

वह कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान, कुछ कपड़े, गहने और जरूरी दस्तावेज बचा पाईं। बाकी सामान, जिसमें सोफा सेट, बिस्तर, अलमारी और बर्तन शामिल हैं, सब पानी से खराब हो गए।

जमां ने स्वीकार किया कि नए सिरे से शुरुआत करना एक चुनौती होगी।

उन्होंने कहा, ‘हम सुरक्षित हैं, यह हमारे लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है। हमारी बेटियां भी इस नुकसान को स्वीकार कर लेंगी और हम अपना घर फिर से बसा सकते हैं। लेकिन हमें यह भरोसा चाहिए कि ऐसी तबाही दोबारा नहीं होगी।”

उन्होंने कहा,“20 दिन बाद भी हमारे इलाके में पानी जमा हुआ है, जबकि इस जगह पर कभी बाढ़ नहीं आई थी। हम न तो अपने घरों को छोड़ सकते हैं और न ही वहां सुरक्षित तरीके से रह सकते हैं।’

जमां, उनका परिवार और इलाके के निवासी अब अधिकारियों से सुरक्षा और समाधान का भरोसा मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि वे अपनी जिंदगी को फिर से व्यवस्थित करना शुरू कर सकें।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश


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