Supreme Court Observation on OBC reservation || Image- Live Law File
नई दिल्ली: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की है। (Supreme Court Observation on OBC reservation) अदालत ने सवाल उठाया कि जिन परिवारों ने आरक्षण की मदद से शिक्षा और आर्थिक रूप से प्रगति कर ली है, क्या उनके बच्चों को भी आरक्षण का लाभ मिलता रहना चाहिए।
IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़े
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि अगर माता-पिता दोनों आईएएस अधिकारी हैं और अच्छी नौकरी व आय हासिल कर चुके हैं, तो फिर बच्चों को दोबारा आरक्षण क्यों मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और आर्थिक मजबूती से सामाजिक स्थिति भी बेहतर होती है।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी कर्नाटक के एक मामले की सुनवाई के दौरान आई। यह मामला एक ऐसे उम्मीदवार से जुड़ा है, जो कुरुबा समुदाय से आता है और ओबीसी आरक्षण के तहत सहायक अभियंता पद के लिए चुना गया था।
लेकिन जिला जाति और आय सत्यापन समिति ने उसे क्रीमी लेयर में मानते हुए जाति वैधता प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया। (Supreme Court Observation on OBC reservation) अधिकारियों के अनुसार उम्मीदवार के परिवार की सालाना आय लगभग 19.48 लाख रुपये थी। साथ ही उसके माता-पिता दोनों सरकारी कर्मचारी हैं। कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी माना था कि परिवार की आय तय सीमा से ज्यादा है, इसलिए उम्मीदवार क्रीमी लेयर में आता है और उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जब परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुका है, तब भी लगातार आरक्षण लेना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मकसद सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को आगे लाना है। वहीं उम्मीदवार के वकील ने दलील दी कि सरकारी कर्मचारियों के मामले में केवल वेतन के आधार पर क्रीमी लेयर तय नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि माता-पिता किस श्रेणी की सरकारी सेवा में हैं, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
वकील ने यह भी कहा कि अगर सिर्फ वेतन को आधार बनाया जाए, तो छोटे पदों पर काम करने वाले कर्मचारी भी आरक्षण से बाहर हो सकते हैं। (Supreme Court Observation on OBC reservation) उन्होंने बताया कि कर्नाटक सरकार के नियमों में वेतन और कृषि आय को क्रीमी लेयर तय करने में शामिल नहीं किया जाता।
यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। हाई कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार के नियम राज्य सरकार की आरक्षण नीति पर लागू नहीं होते। इसलिए उम्मीदवार का परिवार क्रीमी लेयर की सीमा से ऊपर माना जाएगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और अदालत ने आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है।
STORY | SC questions quota to children of economically, educationally advanced families in backward classes
Observing that with educational and economic empowerment there is social mobility, the Supreme Court on Friday questioned the continued grant of reservation benefits to… pic.twitter.com/raSX1VTUxB
— Press Trust of India (@PTI_News) May 22, 2026
IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़े