जातीय समूहों के बंद के कारण मणिपुर के अधिकतर हिस्सों में जनजीवन अस्त-व्यस्त

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जातीय समूहों के बंद के कारण मणिपुर के अधिकतर हिस्सों में जनजीवन अस्त-व्यस्त

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  • Publish Date - April 22, 2026 / 04:12 PM IST,
    Updated On - April 22, 2026 / 04:12 PM IST

इंफाल, 22 अप्रैल (भाषा) मणिपुर में अलग-अलग जातीय संगठनों द्वारा बुधवार को बुलाए गए बंद के कारण राज्य के 16 में से 12 जिलों में आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी में सात अप्रैल को हुए बम हमले के विरोध में संयुक्त कार्य समिति (जेएसी) द्वारा बुलाए गए पांच-दिवसीय बंद के चौथे दिन, घाटी के सभी पांच जिले प्रभावित रहे। इस हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि इस आंदोलन के तहत इंफाल पश्चिम जिले के सगोलबंद और पात्सोई सहित कई इलाकों से सड़कों पर अवरोध की खबरें मिलीं।

यूनाइटेड नगा काउंसिल द्वारा बुलाए गए तीन-दिवसीय पूर्ण बंद के दूसरे दिन, छह पहाड़ी जिलों में नगा-बहुल इलाकों में भी आम जनजीवन प्रभावित हुआ।

यह बंद 18 अप्रैल को उखरुल जिले के टीएम कासोम में घात लगाकर किए गए हमले में दो तांगखुल नगा लोगों की हत्या के विरोध में था।

अधिकारियों ने बताया कि बंद समर्थकों ने नोनी जिले और इंफाल पूर्व के याइंगंगपोकपी में भी सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे केंद्रीय सुरक्षा बलों की आवाजाही बाधित हुई।

चुराचांदपुर जिले में, जोमी समन्वय समिति के तत्वावधान में विभिन्न संगठनों द्वारा बुलाए गए 13 घंटे के बंद ने दैनिक जीवन को प्रभावित किया। यह विरोध प्रदर्शन भाजपा विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे के लिए न्याय की मांग को लेकर था।

वाल्टे मई 2023 में जातीय हिंसा के दौरान भीड़ के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका इलाज चलता रहा। इस साल फरवरी में गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया।

प्रभावित जिलों में स्कूल, बैंक, बाज़ार और अधिकांश प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि सार्वजनिक परिवहन के साधन सड़कों से नदारद रहे।

कई जगहों पर केवल दवा की दुकानें ही खुली रहीं। सरकारी कार्यालयों में भी उपस्थिति बहुत कम रही और सड़कें सुनसान नज़र आ रही थीं।

भाषा वैभव अविनाश

अविनाश