नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी. वी. नागरत्ना ने शनिवार को कहा कि कानूनी व्यवस्था लंबित मामलों, देरी और बढ़ती लागत की समस्या से जूझ रही है। उन्होंने वकीलों से अपनी सोच बदलने, अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करने और न्याय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जब किसी बार काउंसिल को उसके सदस्य ही सम्मान नहीं देते, तो यह कानूनी पेशे के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
उन्होंने कहा कि बार काउंसिल को पेशेवर नैतिकता, सदाचार और पेशेवर दक्षता को बनाए रखने में अपनी भूमिका और महत्व पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि वकील भी परेशान वादियों को न्याय दिलाने और देश में लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के प्रति अपने कर्तव्यों पर विचार करें।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ‘‘इस देश के वकील हमारे संविधान के मूल्यों के ध्वजवाहक हैं। बार की किसी भी चूक या गलती का हमारे राजनीतिक और नागरिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। यही वजह है कि हमारे समाज में उनका इतना महत्व है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं बार के प्रत्येक सदस्य से विनम्रतापूर्वक आग्रह करती हूं कि वे अपनी सोच बदलें और अपने मुवक्किलों के लिए जनसेवा की भावना से काम करने का प्रयास करें, अन्यथा भविष्य में वे अपनी प्रासंगिकता खो सकते हैं। ऐसा होना हमारी न्याय व्यवस्था और देश में कानून के शासन को बनाए रखने के लिए विनाशकारी होगा।’’
दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की। दीक्षांत समारोह में उनके अलावा उच्च न्यायालय के कई अन्य न्यायाधीश और एनएलयू, दिल्ली के कुलाधिपति प्रोफेसर जी. एस. वाजपाई भी मौजूद थे।
भाषा शफीक माधव
माधव